
नई दिल्ली/मथुरा/द्वारका/पुरी । देशभर में (Across the Country) भगवान श्रीकृष्ण के 5253वें जन्मोत्सव (5253rd Birth Anniversary of Lord Shri Krishna) की धूम मची है (Is being Celebrated with Great Enthusiasm) ।
मथुरा की पावन जन्मभूमि से लेकर गुजरात के द्वारकाधीश मंदिर, दिल्ली के इस्कॉन व बिड़ला मंदिर और जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर तक सुबह मंगला आरती के साथ जन्मोत्सव के आयोजनों की शुरुआत हुई। मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। वर्ष 2024 से शुरू हुई परंपरा के तहत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर से विशेष टोली मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान पहुंची और लड्डू गोपाल के लिए पारंपरिक उपहार व पूजन सामग्री भेंट की।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक बिड़ला मंदिर व इस्कॉन मंदिर, देवभूमि द्वारका के मुख्य द्वारकाधीश मंदिर और बिहार की राजधानी पटना के इस्कॉन मंदिर को आकर्षक सतरंगी लाइटों व फूलों से सजाया गया है। मध्यरात्रि में निशीथ काल के दौरान पंचामृत अभिषेक और महाआरती के साथ जन्मोत्सव का चरम उल्लास मनाया जाएगा।
ओडिशा के जगन्नाथ पुरी में जन्माष्टमी के दिन एक अत्यंत दुर्लभ और अलौकिक परंपरा निभाई जाती है । इस विशेष गुप्त रस्म के संपादन के लिए मुख्य मंदिर के कपाट करीब 5 घंटे तक आम श्रद्धालुओं के लिए बंद रहेंगे। इस अनुष्ठान के दौरान भगवान जगन्नाथ स्वयं माता यशोदा का वात्सल्य रूप धारण कर श्रीकृष्ण (कान्हा) को जन्म देने की प्रतीकात्मक धार्मिक रस्म पूरी करते हैं।
राजस्थान के राजसमंद स्थित पुष्टिमार्गीय वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख तीर्थ श्रीनाथजी मंदिर, नाथद्वारा में जन्मोत्सव की अनूठी परंपरा का निर्वहन किया गया । नाथद्वारा में कृष्ण जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में श्रीनाथजी को 21 तोपों की शाही सलामी दी गई। नाथद्वारा में तोपों की सलामी देकर ठाकुरजी का जन्मोत्सव मनाने की यह गौरवशाली परंपरा पिछले 352 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। उधमपुर (जम्मू-कश्मीर) में सनातन सभा के तत्वावधान में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें राधा-कृष्ण के बाल स्वरूप में सजे सैकड़ों नन्हे-मुन्ने बच्चों ने मन मोह लिया। स्थानीय संगठनों द्वारा तैयार की गई हस्तनिर्मित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं।
जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा स्थित इस्कॉन मंदिर में उल्लास के साथ जन्माष्टमी मनाई जा रही है। इस्कॉन मंदिर के मैनेजर संदीप वैष्णव ने कहा, “सबसे पहले, मैं पूरे देश और देशवासियों को कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। हम बहुत भाग्यशाली हैं कि विजयवाड़ा में जन्माष्टमी का जश्न मना रहे हैं। विजयवाड़ा में हमारे दो कैंपस हैं और हम दोनों मंदिरों में बड़े पैमाने पर जश्न मना रहे हैं।”
तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित इस्कॉन जगन्नाथ मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी बहुत उत्साह के साथ मनाई गई। भक्तों ने सुबह से ही पूजा-अर्चना की और विशेष अनुष्ठानों व अखंड नाम संकीर्तन में भाग लिया। भगवान बलराम, सुभद्रा और कृष्ण को विशेष वस्त्राभूषणों से सजाया गया। भक्तों ने “हरे राम, हरे कृष्ण” का जाप करते हुए मंदिर की परिक्रमा की, और कई लोग बच्चों को कृष्ण और राधा के रूप में तैयार करके लाए थे। शाम के लिए कलश अभिषेक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, साथ ही भक्तों को प्रसाद भी बांटा जा रहा है।
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