img-fluid

800 साल पुरानी बीहड़ वाले सैयद बाबा की मजार पर संकट, वन विभाग ने किया रास्ता बंद

January 31, 2026

इटावा: इटावा जिले के फिशर वन क्षेत्र में स्थित बीहड़ वाले सैयद बाबा की करीब 800 साल पुरानी मजार को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. मुख्यमंत्री कार्यालय में की गई शिकायत के बाद वन विभाग ने जांच कर मजार को वन भूमि पर स्थित मानते हुए नोटिस जारी किया है. जमीन से जुड़े दस्तावेज न मिलने की स्थिति में मजार को अवैध बताते हुए ध्वस्तीकरण और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. साथ ही मजार तक पहुंचने वाले रास्ते को खुदाई कर बंद कर दिया गया है और वहां पर आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है.

फिशर वन क्षेत्र में स्थित इस मजार को लेकर आईजीआरएस के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई थी. शिकायत के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय से तीन जनवरी को जांच के निर्देश जारी किए गए. इसके बाद वन विभाग की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर फिशर वन क्षेत्र का निरीक्षण और सर्वे किया. मजार की स्थिति की जांच की.

जांच के दौरान वन विभाग की टीम ने पाया कि मजार फिशर वन के कंपार्टमेंट नंबर तीन में स्थित है और पूरी तरह वन भूमि के भीतर बनी हुई है. टीम ने मौके पर पहुंचकर मापजोख की और पुराने नक्शों का अवलोकन किया, जिसमें यह क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत दर्ज पाया गया.

वन विभाग की टीम ने जांच के दौरान स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई तो सामने आया कि मजार की देखरेख इटावा शहर के आकालगंज निवासी फजले इलाही करते हैं. इसके बाद वन विभाग की ओर से उन्हें नोटिस जारी कर मजार से संबंधित भूमि के अभिलेख प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए. वन रेंज अधिकारी अशोक कुमार शर्मा की ओर से जारी नोटिस में फजले इलाही से मजार की जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे गए थे. विभाग ने स्पष्ट किया कि यदि मजार वैध रूप से स्थापित है, तो उससे संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए जाएं. इसके लिए 22 जनवरी तक की समय सीमा तय की गई थी.


  • डीएफओ विकास नायक ने बताया कि फजले इलाही की ओर से दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात कही गई थी, लेकिन तय समय सीमा तक कोई भी कागजात वन विभाग को नहीं सौंपे गए. इसके बाद विभाग ने मजार को प्रथम दृष्टया अवैध मानते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी. दस्तावेज न मिलने के बाद वन विभाग ने गुरुवार को मजार तक जाने वाले रास्ते पर कार्रवाई करते हुए करीब एक किलोमीटर लंबे कच्चे रास्ते पर पांच बड़े गड्ढे खोद दिए. इससे वाहन और पैदल दोनों तरह की आवाजाही बाधित हो गई है और मजार तक पहुंचना मुश्किल हो गया है.

    वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि फरवरी के पहले सप्ताह में मजार पर सालाना उर्स आयोजित होना प्रस्तावित था. इसी को देखते हुए विभाग ने यह कदम उठाया है. वन विभाग द्वारा जारी नोटिस में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि मजार स्थल से संबंधित भूमि के वैध दस्तावेज शीघ्र उपलब्ध नहीं कराए गए तो वन भूमि पर बने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इसके तहत मजार को ध्वस्त करने और प्रशासनिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

    डीएफओ नायक ने बताया कि फिशर वन क्षेत्र में यह मजार कब स्थापित की गई थी. इसको लेकर न तो स्थानीय लोगों के पास कोई ठोस जानकारी है और न ही वन विभाग के पास कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध है. समय के साथ मजार का स्वरूप बदलता गया और धीरे धीरे इसका निर्माण बड़ा होता चला गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मजार कई सौ साल पुरानी है. इसे मुगल काल या अंग्रेजी शासन काल का बताता जाता है. कुछ लोग इसे उत्तर प्रदेश में वन विभाग की स्थापना से भी पहले की मजार बताते हैं. हालांकि इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है.

    Share:

  • भारत की सांस्कृतिक विरासत की वापसी अमेरिका लौटाएगा चोरी की गई तीन मूर्तियां

    Sat Jan 31 , 2026
    नई दिल्ली। भारत(India) की सांस्कृतिक विरासत (cultural heritage)से जुड़ा एक अहम और ऐतिहासिक फैसला (historic decision)अमेरिका में लिया गया है। वाशिंगटन डीसी स्थित स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ((Smithsonian National Museum)ऑफ एशियन आर्ट(Asian art) ने यह स्वीकार किया है कि उसके संग्रह में मौजूद तीन प्राचीन कांस्य मूर्तियां दशकों (ancient bronze sculptures)पहले भारत के दक्षिणी हिस्से के […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved