
इंदौर। नगर निगम द्वारा एक बार फिर नया नवाचार किया जा रहा है। इस नवाचार के तहत शहर में मौजूद सभी 10 गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन (जीटीएस) पर डीजल के टैंक बनाए जाएंगे। नगर निगम की गाडिय़ों को डीजल अब पेट्रोल पंप से नहीं, बल्कि कचरे के ट्रांसफर स्टेशन से मिलेगा।
नगर निगम के पास कचरा एकत्रित करने कचरे को ट्रेंचिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए गाडिय़ां होने के साथ ही साथ जेसीबी, डंपर, अधिकारियों की गाड़ी आदि हैं। निगम के पास इतनी संख्या में गाडिय़ां हैं कि इन गाडिय़ों में उपयोग किए जाने वाले डीजल का हर महीने का बिल ही 44 करोड़ रुपए का होता है। पुलिस पेट्रोल पंप क्रमांक 1 से लगाकर चार तक से डीजल क्रय किया जाता है। पेट्रोल पंप पर डीजल लेने के लिए नगर निगम के जोनल कार्यालय सहित सभी दूर की गाडिय़ां दूरी तय करते हुए पेट्रोल पंप तक जाती हैं। निगम द्वारा इन गाडिय़ों को डीजल लेने के लिए कूपन दिए जाते हैं।
इस कूपन के माध्यम से यह गाडिय़ां संबंधित पेट्रोल पंप पर जाकर डीजल भरवाती हैं। वर्तमान में प्रचलित इस व्यवस्था में इन गाडिय़ों के अपने स्थान से डीजल लेने के लिए जाना पड़ता है। इसमें दूरी ज्यादा होने के कारण इन गाडिय़ों का जाने आने में भी बहुत डीजल जल जाता है। नगर निगम द्वारा पिछले काफी समय से इस बात पर विचार किया जा रहा था कि डीजल लेने के लिए गाडिय़ों के जाने में लगने वाले डीजल की बचत कैसे की जाए। पेट्रोल पंप तक जाना इन गाडिय़ों के लिए काफी खर्चीला साबित होता था।
अब नगर निगम ने वह तरीका ढूंढ लिया है, जिसके माध्यम से यह बचत हो जाएगी। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि इस समस्या के समाधान हेतु अब नगर निगम के द्वारा स्मार्ट डीजल डिस्पेंसर टैंक बनाया जाएगा। यह नई प्रणाली लागू किए जाने के साथ निगम के डिजिटलीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठ जाएगा। इस तरह का टैंक क्रय करने पर नगर निगम को 8 लाख रुपए प्रति टैंक का खर्चा करना पड़ेगा। निगम द्वारा यह प्रस्ताव बनाया गया है कि इस तरह के 10 टैंक इंदौर के सभी 10 गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन पर स्थापित किए जाएं। इस कार्य पर कुल 80 लाख रुपए का खर्च होगा। टैंक की स्थापना करने वाली कंपनी द्वारा ही टैंक का 5 साल तक संचालन और संधारण भी किया जाएगा।
निगम को होगी बचत
भार्गव ने बताया कि इस योजना को क्रियान्वित करने से नगर निगम की गाडिय़ों को समय पर कम ईंधन लगाकर डीजल भरवाने के लिए पहुंचने में आसानी हो जाएगी। इससे इन गाडिय़ों का वक्त और डीजल दोनों बचेगा। डीजल वितरण की व्यवस्था में भी तीव्रता आएगी। डीजल के उपयोग की निगरानी होगी और उसमें पारदर्शिता आने से कठिनाई भी दूर की जा सकेगी। डीजल की अनाधिकृत खपत की संभावना को भी समाप्त किया जा सकेगा।
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