
नई दिल्ली । राजस्थान में कांग्रेस के सामने सियासी संकट जैसी स्थिति खड़ी होने लगी है। मध्य प्रदेश की तरह रणनीति बनाने में जुटी भाजपा ने यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सामने सत्ता में बने रहने के लिए एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल सरकार पर आया संकट टल गया है लेकिन कहा नहीं जा सकता है कि राजस्थान की सियासत में यह संकट कब तक टला रह सकता है।
दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की एक अहम बैठक आज जयपुर में बुलाई गई है। प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी की यह बैठक होने वाली है। बैठक में राजस्थान के मौजूदा हालात को लेकर चर्चा होने के साथ ही सूत्रों की माने तो सरकार बनाने के सभी विकल्पों पर विचार किया जाएगा। जिससे लगता है कि यहां भी भाजपा मध्य प्रदेश जैसी स्थितियों को दोहराएगी । हालांकि भाजपा के ओम माथुर जैसे बड़े नेताओं का कहना है कि राजस्थान में सरकार पर आया संकट कांग्रेस का अंदरूनी मामला है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भाजपा को यहां चुप बैठे रहना चाहिए ।
उधर, कांग्रेस से से बागी बन चुके सचिन पायलट आज दिल्ली में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करेंगे। सचिन पायलट को कांग्रेस ने मंगलवार के दिन उपमुख्यमंत्री पद से हटा दिया था। उनसे प्रदेश अध्यक्ष का पद भी ले लिया गया है । प्रदेश की कमान अब नए हाथों में है। सचिन पायलट के एक करीबी और राजस्थान के पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह के साथ-साथ रमेश मीणा को भी मंत्री पद से हाथ धोना पड़ा है । कांग्रेस आलाकमान सचिन पायलट को लेकर लगातार कड़े तेवर दिखा रहा है। अशोक गहलोत के साथ 102 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है जबकि सचिन पायलट के खेमे में 25 विधायकों के होने की बात कही जा रही है।
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