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पंडित प्रदीप मिश्रा बोले- संघ और शिव एक समान हैं, दोनों राष्ट्र और सृष्टि के लिए विष पीते हैं

January 03, 2026

भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक में कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने संघ की तुलना भगवान शिव से करते हुए कहा कि संघ और शिव के भाव में अद्भुत समानता है। जैसे भगवान शिव ने समस्त सृष्टि की रक्षा के लिए विष पिया, वैसे ही संघ भी प्रतिदिन आरोपों और आलोचनाओं का विष पीकर संयम, सेवा और राष्ट्रहित में कार्य करता है।

पंडित मिश्रा ने कहा कि समाज के अलग-अलग वर्ग अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन यह आत्मचिंतन भी आवश्यक है कि हमने राष्ट्र के लिए क्या किया। उन्होंने कहा कि जन्म किसी भी जाति में हो, पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही होती है। प्रत्येक भारतीय में समाज और राष्ट्र को आगे बढ़ाने की क्षमता है।

उन्होंने धर्मांतरण को केवल वर्तमान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने वाला गंभीर षड्यंत्र बताया और समाज को इसके प्रति सजग रहने का आह्वान किया। पंडित मिश्रा ने ‘ग्रीन महाशिवरात्रि’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण का मजबूत उदाहरण है।


  • इससे पहले बैठक को संबोधित करते हुए सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं, बल्कि भारतीय समाज का स्वभाव है। सरसंघचालक डॉ. भागवत ने कहा कि कानून समाज को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन समाज को चलाने और जोड़कर रखने का कार्य सद्भावना ही करती है। विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है। बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला समाज हिंदू समाज है। उन्होंने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर झगड़ा नहीं करता।

    उन्होंने यह भी कहा कि समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को यह कहकर तोड़ने का प्रयास किया गया कि वे अलग हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना आवश्यक है। मिलना, संवाद करना और एक-दूसरे के कार्यों को जानना ही सद्भावना की पहली शर्त है। उन्होंने कहा कि समर्थ को दुर्बल की सहायता करनी चाहिए। दो सत्रों में आयोजित इस बैठक में मध्यभारत प्रांत के 16 जिलों से विभिन्न समाजों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने सामाजिक, शैक्षणिक, पर्यावरणीय और सेवा कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज स्वयं आगे बढ़कर समस्याओं का समाधान करेगा और एक समाज, एक राष्ट्र की भावना को मजबूत करेगा।

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