
कोलकाता । भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल के सीईओ (West Bengal CEO) एसआईआर के सुनवाई सत्रों में (In SIR Hearing Sessions) राजनीतिक हस्तक्षेप रोकें (Prevent Political Interference) ।
भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय को निर्देश दिया कि राज्य में मतदाता सूची के मसौदे पर चल रहे सुनवाई सत्रों के दौरान बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) या किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधियों का हस्तक्षेप न हो। ये सुनवाई पश्चिम बंगाल में तीन चरणों वाली विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दूसरे चरण का हिस्सा हैं। भारत निर्वाचन आयोग का यह निर्देश हुगली और कूच बिहार जिलों में हाल ही में हुई घटनाओं के मद्देनजर आया है, जहां राज्य मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ सदस्य सहित तृणमूल कांग्रेस के तीन विधायकों के हस्तक्षेप के बाद सुनवाई सत्रों को कथित तौर पर बाधित किया गया और जबरन बंद कराया गया।
सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने सुनवाई सत्रों के दौरान अपनी पार्टी के बीएलए की उपस्थिति और प्रवेश की मांग की, जिसके कारण व्यवधान उत्पन्न हुआ। आयोग ने सीईओ कार्यालय को यह निर्देश भी दिया है कि वह जिला मजिस्ट्रेटों और जिला निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दे कि किसी भी जिले में इसी तरह के हस्तक्षेप या सुनवाई सत्रों को जबरन रोकने के प्रयासों के मामले में आवश्यक कार्रवाई करें।
सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “सीईओ कार्यालय को दिए गए अपने निर्देश में आयोग ने कहा है कि सुनवाई प्रक्रिया में निष्पक्षता, तटस्थता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए किसी भी दल के बीएलए या राजनीतिक हस्तक्षेप को समाप्त करना आवश्यक है।” इस सप्ताह की शुरुआत में, ईसीआई ने स्पष्ट किया था कि मसौदा मतदाता सूची से संबंधित दावों और आपत्तियों पर चल रहे सुनवाई सत्रों में तृणमूल कांग्रेस की दल बीएलए को अनुमति देने की मांग को क्यों खारिज कर दिया गया था। आयोग ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस की ऐसी मांग को स्वीकार करने से उसे राज्य में पंजीकृत अन्य राजनीतिक दलों, जिनमें छह राष्ट्रीय दल और दो राज्य दल शामिल हैं, को भी इसी तरह की भागीदारी की अनुमति देनी होगी।
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