
निगम ने भेजा प्रस्ताव और कहा- अपनी सहमति दो तो करें एमओयू
इंदौर। भागीरथपुरा (Bhagirathpura) में दूषित पानी (contaminated water) से 23 लोगों की मौत होने के बाद नगर निगम (Municipal council) द्वारा पूरे शहर में वाटर ऑडिट करने का फैसला लिया गया है। इसके लिए निगम की ओर से आईआईटी इंदौर को प्रस्ताव भेजा गया है। यदि आईआईटी द्वारा सहमति दे दी जाती है तो फिर निगम द्वारा उनके साथ एमओयू हस्ताक्षरित किया जाएगा।
भागीरथपुरा में दूषित पानी से सैकड़ो लोगों के बीमार होने का मामला सामने आने के बाद से बार-बार यही कहा जा रहा है कि यदि नगर निगम द्वारा पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया होता तो यह हादसा नहीं होता। ऐसे में अब आने वाले समय में भागीरथपुरा के जैसा हादसा दूसरा नहीं हो, इसके लिए नगर निगम द्वारा कदम उठाना शुरू कर दिया गया है। निगम की ओर से राज्य शासन के निर्देश पर हर मंगलवार को एक तरफ जहां जल सुनवाई शुरू कर दी गई है, वहीं दूसरी तरफ पानी से संबंधित शिकायतों के समाधान को प्राथमिकता दी जा रही है। इसके साथ ही नगर निगम द्वारा पूरे शहर में वाटर ऑडिट करने का फैसला लिया गया है। इस फैसले के तहत जगह-जगह जाकर रेंडम रूप से पानी की जांच कर उसकी गुणवत्ता की स्थिति को देखा जाएगा। वाटर ऑडिट करने के लिए नगर निगम द्वारा आईआईटी इंदौर को प्रस्ताव भेजा गया है। नगर निगम के पानी और ड्रेनेज विभाग के अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक ने बताया कि नगर निगम द्वारा वाटर ऑडिट करने के लिए आईआईटी को प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव में आईआईटी से कहा गया है कि वह अपनी टीम लगाकर पूरे इंदौर में रेंडम तरीके से पानी की गुणवत्ता की जांच करे और उस जांच की रिपोर्ट से नगर निगम को अवगत कारण, ताकि उस रिपोर्ट में जहां भी कहीं पानी की गुणवत्ता खराब होती हुई पाई जाएगी, वहां पर नगर निगम द्वारा काम कर पानी की गुणवत्ता को सुधारने की पहल की जाएगी। निगम द्वारा भेजे गए प्रस्ताव का अभी आईआईटी की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। यदि नगर निगम द्वारा भेजे गए इस प्रस्ताव पर आईआईटी द्वारा सहमति दे दी जाएगी तो फिर दोनों के बीच एमओयू हस्ताक्षरित होगा।
सिंगार ने की थी पहल
हाल ही में मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार जब इंदौर आए थे तो उन्होंने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वाटर ऑडिट करने की पहल की थी। उन्होंने इन क्षेत्रों में जाकर पानी के नमूने लिए और हाथोहाथ उन नमूनों की जांच की। इसमें शहर के कई क्षेत्रों में पानी गंदा और पीने योग्य नहीं पाया गया था। इसके बाद इंदौर में कांग्रेस की न्याय यात्रा के मौके पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी यह घोषणा की थी कि कांग्रेस के नेता हर वार्ड में जाकर वहां पर वाटर ऑडिट करेंगे। इस घोषणा के अनुसार कांग्रेस ने भोपाल में तो काम किया, लेकिन इंदौर में कोई काम नहीं हुआ।
सीएम ने दिए थे निर्देश
हाल ही में जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा हर मंगलवार को जल सुनवाई करने के निर्देश दिए गए थे तो उसके साथ ही नगर निगम को यह भी कहा गया था कि वह वाटर ऑडिट करवा कर पानी की गुणवत्ता की जांच करें और यह सुनिश्चित करे कि नागरिकों को पीने के लिए अच्छा पानी मिले।