
इंदौर (Indore)। नर्मदा पेयजल योजना के चौथे चरण के भूमिपूजन समारोह में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Chief Minister Dr. Mohan Yadav) भागीरथपुरा की घटना को लेकर कांग्रेस पर भडक़ गए। उन्होंने कहा कि सिर में जितने बाल हंै, उससे ज्यादा तो कांग्रेस ने पाप किए हैं। लाशों पर राजनीति इंदौर की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी, वहीं नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेसियों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्होंने इस शहर के लिए एक काम किया हो तो बता दें, वरना हम बताते हैं कि जनता की चुनी भाजपा सरकार ने क्या-क्या किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर ने विकास, स्वच्छता, उद्योग, व्यापार और सुशासन के क्षेत्र में इंदौर ने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है, जिस पर पूरे मध्यप्रदेश को गर्व है। इंदौर की पहचान उसकी संघर्षशील जनता, अदम्य हौसलों और विकासशील सोच से है। आज प्रदेश का हर जिला इंदौर जैसा बनना चाहता है। उन्होंने भागीरथपुरा के घटनाक्रम की चर्चा करते हुए कहा कि कठिन समय में सरकार, नगर निगम और प्रशासन ने पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ नागरिकों के साथ खड़े रहकर हरसंभव प्रयास किए। उन्होंने कहा कि आपदा के समय राजनीति करना इंदौर स्वीकार नहीं करेगा। कांग्रेस ने यदि लाश पर राजनीति की तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
कांग्रेस ने तो इतने पाप किए हैं कि सिर के बाल भी कम पड़ जाएं। उधर कई दिनों से विरोधियों के आरोप-प्रत्यारोप झेल रहे विजयवर्गीय ने कांग्रेस नेताओं को खुली चुनौती देते हुए कहा कि जो लोग आज आंदोलन कर रहे हैं, वे यह बताएं कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने इंदौर शहर के लिए क्या-क्या किया है। अगर वे नहीं बता पाए, तो मैं बताने को तैयार हूं कि भारतीय जनता पार्टी ने इस शहर के लिए क्या-क्या किया है। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी ने इंदौर के संघर्ष और विकास को ठीक से देखा नहीं है। उन्होंने वरिष्ठ पत्रकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले राहुल बारपुते जैसे वरिष्ठ पत्रकार और स्व. राजेंद्र माथुर जैसे प्रतिष्ठित संपादक आंदोलनों के पीछे मजबूती से खड़े रहते थे और शहर के हित में सकारात्मक भूमिका निभाते थे। उन्होंने कहा कि एक घटना को लेकर इंदौर की जनता और शहर का मजाक बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं, सफाईकर्मियों का भी अपमान किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि क्या आंदोलन करने वालों के घर की मां-बहन-बेटियां सडक़ों पर निकलकर रात दो बजे सफाई करने जा सकती हैं? उनका अपमान करने वाले बेशर्मों को माफी मांगना चाहिए। उन्होंने इंदौर की स्वच्छता पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि इंदौर नंबर वन था, इंदौर नंबर वन है और इंदौर नंबर वन रहेगा।
जो चार लोगों को भोजन नहीं कराते वो भोजन भंडारों पर उंगली उठाते हैं…
भोजन भंडारे की राजनीति के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो लोग चार लोगों को घर में भोजन नहीं कराते हैं, वे भोजन भंडारों पर उंगली उठाते हैं। भोजन भंडारे जनता की भावना और भागीदारी से होते हैं। कोई आटा देता है, कोई घी-तेल, कोई शकर देता है तो कोई सब्जी-मसाले। हम तो केवल माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि मैं पेट की पीड़ा जानता हूं और इसलिए भोजन के माध्यम से दिलों तक पहुंचने का प्रयास करता हूं। कथा लोगों के मन की व्यथा को दूर करती है। यह राजनीति का नहीं, बल्कि धर्मनीति का काम है। यदि विरोधी भी कथा, भोजन भंडारे का आयोजन करें तो उनके भी कार्यक्रम में मैं शिरकत कर अपने हाथों से लोगों को भोजन कराऊंगा।
नर्मदा भी जनआंदोलन से इंदौर आई
विजयवर्गीय ने इंदौर में नर्मदा के जल आंदोलन तथा नर्मदा के जल लाने की संघर्ष यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इंदौर का ऐतिहासिक जनआंदोलन था। इस आंदोलन में शहर के नागरिकों के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी पूरी ताकत से उतरा था। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद सेठी ने इंदौर तक नर्मदा का पानी लाने की योजना को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। उस समय एक इंजीनियर थे आपटे। उन्होंने पैदल घूमकर पूरे क्षेत्र का दौरा किया और फिर दावा किया था कि नर्मदा का पानी इंदौर तक लाया जा सकता है। फिर प्रदेश में श्यामाचरण शुक्ल मुख्यमंत्री बने, जो कि इंदौर के दामाद भी थे। उनके समक्ष इंदौर के लोगों ने प्रदर्शन किया और कहा कि श्यामा भैया पानी दो। फिर उन्होंने इस योजना को मंजूरी दी थी। विजयवर्गीय ने मालवा मिल चौराहे के अनोखी पहलवान को भी याद किया। पहलवान ने संकल्प लिया था कि जब तक नर्मदा का पानी लाने के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिलेगी, तब तक वह खड़े रहेंगे। वह 2 महीने तक खड़े रहे पहले दोनों पैर पर खड़े रहते थे और बाद में एक पैर पर खड़े रहना शुरू कर दिया। सारे शहर के लोग उनको देखने के लिए मालवा मिल पर जाते थे। उन्होंने कहा कि यदि नर्मदा नहीं आती, तो इंदौर आज जिस रूप में है वह कभी नहीं बन पाता।
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