
नई दिल्ली । Lohe Ka Challa Kaise Pahne: ज्योतिष शास्त्र न्याय के देवता शनि देव को कर्म प्रधान माना गया है. शनि देव (Shani Dev)व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल देते करते हैं. जब किसी जातक की कुंडली (Horoscope)में शनि का अशुभ प्रभाव, साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही हो, तो जीवन में बाधाएं और मानसिक तनाव बढ़ने लगता है. इन कष्टों को कम करने और शनि देव की कृपा पाने के लिए ‘लोहे का छल्ला'(ring) पहनना एक अचूक उपाय माना गया है. हालांकि, लोहे का छल्ला सिर्फ एक आभूषण नहीं है. बल्कि इसे धारण करने के कुछ कड़े नियम हैं जिनका पालन न करने पर इसका प्रभाव निष्फल हो सकता है और शनि से संबंधित कष्टों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि शनि की साढ़ेसाती( Sade Sati)और ढैय्या से बचने के लिए लोहे का छल्ला किस प्रकार धारण(holding) करना चाहिए.
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, हमारे हाथ की मध्यमा उंगली का संबंध सीधे शनि देव से होता है. पुरुषों के लिए इसे दाएं हाथ की मध्यमा बीच वाली उंगली में पहनना सबसे शुभ माना जाता है. विशेष परिस्थितियों में इसे बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में भी धारण किया जा सकता है.
शुभ दिन और मुहूर्त
लोहे के छल्ले को किसी भी दिन पहन लेना सही नहीं है. इसे धारण करने के लिए सबसे उपयुक्त दिन शनिवार माना गया है. यह दिन मुख्यरूप से शनि देव को समर्पित है. अमावस्या तिथि पर इसे पहनना अत्यंत फलदायी होता है. इसे पहनने का सबसे श्रेष्ठ समय प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) माना जाता है.
धारण करने की सही विधि
छल्ले को सीधे बाजार से लाकर उंगली में न डालें, इसे पहले सिद्ध करना जरूरी है. शुद्धिकरण के लिए सबसे पहले छल्ले को सरसों के तेल में डुबोकर रखें. ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें. इसके बाद इसे गंगाजल से धोकर शुद्ध कर लें. छल्ले को शनि देव की प्रतिमा के पास रखें, शनि चालीसा का पाठ करें और आरती करें. अंत में शनि देव से अपने कष्टों को दूर करने की प्रार्थना करते हुए इसे धारण करें.
किसे पहनना चाहिए और किसे नहीं?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा चल रही हो, उनके लिए यह सुरक्षा कवच की तरह काम करता है. बिना कुंडली विश्लेषण के इसे न पहनें. कुछ विशेष योगों में यह उल्टा प्रभाव भी डाल सकता है, इसलिए किसी विशेषज्ञ ज्योतिषी से सलाह जरूर लें.
लोहे का छल्ला पहनने के लाभ
अगर नियमों के साथ इसे धारण किया जाए, तो इसके कई सकारात्मक परिणाम देखने को मिलते हैं. नौकरी, व्यापार और अटके हुए कार्यों में आ रही देरी दूर होती है. यह नकारात्मक ऊर्जा और अज्ञात भय को कम कर आत्मविश्वास बढ़ाता है. शनि देव की कृपा से धीरे-धीरे आर्थिक स्थिति मजबूत होने लगती है. यह व्यक्ति को गलत कर्मों से बचाकर सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है.
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