img-fluid

नितिन नबीन के सामने चुनौतियों का अंबार, ‘सूखे’ में कमल खिलाने का टारगेट, इन राज्यों पर फोकस

January 20, 2026

नई दिल्ली: बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन की मंगलवार को ताजपोशी हो गई है. अटल बिहारी वाजपेयी से नरेंद्र मोदी युह तक स बीजेपी ने अपने 45 साल के संघर्ष में तमाम तरह के उतार चढ़ाव से गुजरते हुए शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है. अब जब बीजेपी नबीन पथ पर चल पड़ी है. 45 साल के युवा चेहरे नितिन नबीन के हाथों में बीजेपी की कमान है तो उनके सामने चुनौतियां का अंबार भी है.

नितिन नबीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ऐसे समय बन रहे हैं, जब पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में चुनावी सरगर्मी तेज है. 2026 में जहां पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिण भारत चुनाव है तो 2027 में हिंदी बेल्ट में उनकी अग्निपरीक्षा होगी. खासकर उत्तर प्रदेश में, जहां पर 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी को नुकसान उठाना पड़ा था.

बीजेपी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष के सामने सिर्फ चुनावी चुनौतियां ही नहीं है बल्कि बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग को मजबूत करने की होगी. साथ ही पार्टी के पुराने नेताओं के साथ ही सामांजस्य बनाकर चलने की होगी. हालांकि, पीएम मोदी ने नितिन नबीन को अपना बॉस बताकर साफ-साफ सियासी संदेश दे दिया है. ऐसे में अब देखना है कि नितिन नबीन सियासी पथ पर आगे बढ़ते हैं?


  • नितिन नबीन के सामने 2 साल में इन राज्यों चुनाव
    नितिन नबीन तीन साल के लिए बीजेपी के अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं. उनके सामने अगले दो साल में देश के 11 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने है. 2026 में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और असम में चुनाव है तो 2027 में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोवा और मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं.

    2026 और 2027 में देश के जिन एक दर्जन राज्यों में विधानसभा चुनाव है, उसमें से बीजेपी की फिलहाल छह राज्यों में सरकार है. पांच राज्यों में बीजेपी के लिए अभी भी कमल खिलाने की चुनौती है. इस तरह नितिन नबीन के सामने अपनी मौजूदा सरकार को बचाए रखने के साथ-साथ जिन राज्यों में अभी तक सरकार बनी बना सकी है, उनमें कमल खिलाने की चुनौती होगी.

    बीजेपी का सूखा कैसे खत्म करेंगे नबीन
    पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल ऐसे राज्य हैं, जहां बीजेपी अभी तक सरकार नहीं बना पाई है. बीजेपी के सामने असम में तीसरी बार और पुडुचेरी में दूसरी बार सरकार बनाने की चुनौती है. ये चुनावी राज्य बीजेपी के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं, इसे इस तरह समझ सकते हैं कि पीएम मोदी से लेकर अमित शाह तक लगातार इन राज्यों के दौरे कर रहे हैं.

    असम में बीजेपी को कांग्रेस से तगड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है. असम में पिछले चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के बीच बहुत ज्यादा वोटों शेयर में अंतर नहीं रहा था. बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का भी सामना करना पड़ रहा है तो कांग्रेस एक मजबूत गठबंधन के साथ उतरने की तैयारी में है. ऐसे में नितिन नबीन कैसे निपटेंगे,.


  • पश्चिम बंगाल की बात करें तो राज्य में पिछले तीन बार से ममता बनर्जी की सरकार है. टीएमसी की जड़े बंगाल में काफी मजबूत है, जिसके सामने नितिन नबीन को बीजेपी को खड़े करने और बंगाल की सियासी जंग जीतने का चैलेंग होगा. इसकी तरह तमिलनाडु और केरल में तमाम कोशिश कर भी बीजेपी कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी है.

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा, ‘अगले कुछ महीनों में तमिलनाडु, असम, बंगाल, केरल और पुडुचेरी में चुनाव होने वाला है और वहां की डेमोग्राफी की चर्चा हो रही है कि किस प्रकार वहां डेमोग्राफी बदल रही है. यह हमारे लिए चुनौती है, लेकिन हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि भाजपा का कार्यकर्ता अपने संघर्ष और परिश्रम के बल पर इन पांचों राज्यों में सशक्त भाजपा का नेतृत्व प्रदान करे.

    यूपी में हैट्रिक और पंजाब में कमल खिलाने का चैलेंज
    उत्तर प्रदेश में बीजेपी 2017 से सत्ता में है और 2027 का चुनाव पार्टी के लिए काफी अहम माना जा रहा है. 2024 के चुनाव में बीजेपी को यूपी में सियासी तौर पर तगड़ा झटका लगा था. सपा ने पीडीए फॉर्मूले के जरिए बीजेपी का सारा गेम बिगाड़ दिया था. ऐसे में बीजेपी को यूपी में कमबैक कराने का चैलेंज नितिन नबीन के ऊपर होगा, खासकर यूपी में बिगड़े सियासी समीकरण को दुरुस्त करने का भी होगा. देखना है कि नितिन नबीन यूपी में बीजेपी के लिए किस तरह का सियासी माहौल बनाने का काम करते हैं.

    वहीं, पंजाब में अभी भी तक बीजेपी सरकार नहीं बना सकी है. पंजाब में बीजेपी का शिरोमणि अकाली दल से गठबंधन टूट चुका है. पंजाब चुनाव में सिख वोटर अहम होने के चलते बीजेपी की राह मुश्किल भरी रही है, अब देखना होगा कि नितिन नबीन पंजाब में अकेले दम पर चुनावी पथ पर बीजेपी की नैया कैसे पार लगाते हैं. इसके अलावा 2027 में हिमाचल प्रदेश में बीजेपी की वापसी कराने का चैलेंज नितिन नबीन के सामने होगा.

    गुजरात में बीजेपी लंबे समय से सत्ता में है तो उत्तराखंड और गोवा में 10 साल से सत्ता में बनी हुई है. गुजरात पीएम मोदी और अमित शाह के गृह राज्य है, जिसके चलते बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने का चैलेंज है तो गोवा और उत्तराखंड की सरकार को नितिन नबीन कैसे बचाकर रख पाते हैं. इसके अलावा मणिपुर की सियासी मिजाज बीजेपी के लिए काफी चुनौती पूर्ण बन चुका है, जहां पर 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. हिंसा के बाद मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा है. नितिन नबीन के लिए मणिपुर के चुनाव में बीजेपी की वापसी कराना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं है.


  • जाति जनगणना के इफेक्ट का कैसे करेंगे सामना
    देश में इस बार जनगणना के साथ पहली जाति जनगणना भी कराई जा रही है. इसके नतीजे देश की राजनीति पर काफी असर डालेंगे. इन बदलावों से तालमेल बिठाना नितिन नबीन के सामने आने वाली चुनौतियों में प्रमुख होगी. जाति जनगणना के बाद ओबीसी जातियों और सवर्ण जातियों की सही-सही जनसंख्या का पता चलेगा.

    जाति जनगणना से पिछड़ी जातियों की राजनीति को नई धार मिलेगी. नब्बे के दशक में ओबीसी आरक्षण लागू किया गया था तो बीजेपी ने मंडल के सामने कमंडल की पॉलिटिक्स को खड़ी करके अपने सियासी आधार को बचाए रखा था, लेकिन ओबीसी अब देश में एक बड़ी ताकत बनकर उभरा है, राजनीति की दशा और दिशा तय करता है. जाति जनगणना के बाद बीजेपी के लिए नए राजनीतिक माहौल में सामंजस्य बिठाना बड़ी चुनौती होगी.

    जनगणना के नतीजे आने के बाद देश में लोकसभा और विधानसभा सीटों के परिसीमन का काम जटिल काम शुरू होगा. इसी के बाद विधानसभा और संसद में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू होगा. महिला आरक्षण कानून बन चुका है. इन बदले हुए समीकरणों में बीजेपी को आगे ले जाना और जीत की लय को बरकरार रखना नितिन नबीन के सामने चुनौती की तरह होगा.

    बीजेपी को सत्ता में बनाए रखने का नहोगा चैलेंज
    बीजेपी लगातार तीसरी बार देश की सत्ता में है और मौजूदा समय में तकरीबन 20 राज्यों में उसकी सरकार है. नितिन नबीन का बीजेपी अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल तीन साल का हो, लेकिन माना जा रहा है कि उन्हीं के अगुवाई में 2029 का लोकसभा चुनाव होगा. जेपी नड्डा की तरह ही नितिन नबीन के एक साल का एक्सटेंशन दिया जा सकता है. ऐसे में नितिन नबीन को 2029 के लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत हासिल करना है. क्योंकि बीजेपी 2024 के चुनाव में बहुमत से पीछे रह गई थी. इसके चलते नितिन नबीन को सहयोगी दलों के सहारे सरकार बनानी पड़ी.

    बीजेपी को सबसे बड़ा झटका उत्तर प्रदेश ने दिया था, जहां सपा के पीडीए ने बीजेपी के विजय रथ को रोक दिया था. अब नितिन नबीन को यूपी में सपा के पीडीए की काट खोजनी होगी. साल 2029 का लोकसभा चुनाव नए परिसीमन और महिला आरक्षण के साथ कराया जाएगा. ऐसे में नई और बदली हुई परिस्थितियों में नितिन नबीन को पार्टी की रणनीति तैयार करनी होगी. इसके लिए बीजेपी की सोशल इंजीनियिरिंग को धार देनी होगी.

    Share:

  • भाजपा में इलेक्शन नहीं सिलेक्शन होता है - कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी

    Tue Jan 20 , 2026
    नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी (Congress MP Pramod Tiwari) ने कहा कि भाजपा में इलेक्शन नहीं सिलेक्शन होता है (There is selection not election in BJP) । भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पदभार संभालने के बाद तिवारी ने यह प्रतिक्रिया दी । कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved