
नई दिल्ली । गाजा (Gaza) से जुड़े अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (Board of Peace) में शामिल होने के लिए कई देशों ने सहमति जताई है, जबकि यूरोपीय देशों (European countries) समेत कुछ मुल्कों ने इसका सदस्य बनने का निमंत्रण ठुकरा दिया है। कई देशों ने अभी ट्रंप के न्यौते पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। जवाब नहीं देने वालों में भारत भी शामिल है। खबर है कि भारत (India) इसके कुछ बिंदुओं पर विचार कर रहा है। हालांकि, इसे लेकर आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
भारत का क्या है प्लान
एक रिपोर्ट के अनुसार, मामले के जानकार कुछ लोगों ने बताया है कि भारत ने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने को लेकर अंतिम फैसला नहीं लिया है। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजरायल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत गठित बोर्ड में शामिल होने के लिए कई नेताओं को आमंत्रित किया है। उनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं।
वो देश जो अभी शामिल नहीं हो रहे हैं
बोर्ड ऑफ पीस से फिलहाल कई देशों ने दूरी बना ली है। इनमें फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन का नाम शामिल है। वहीं, ब्रिटेन, चीन, क्रोएशिया, इटली, यूरोपीय यूनियन की कार्यकारी शाखा, पराग्वे, रूस, सिंगापुर, स्लोवेनिया, तुर्किये, यूक्रेन ने अब तक कोई फैसला नहीं लिया है।
इन देशों ने स्वीकारा न्योता
अर्जेंटीना, आर्मीनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, मिस्र, हंगरी, कजाखस्तान, कोसोवो, मोरक्को, संयुक्त अरब अमीरात, वियतनाम ने ट्रंप का न्योता स्वीकार कर लिया है। इनमें पाकिस्तान का नाम भी शामिल है। वाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि 30 देश बोर्ड में शामिल हो सकते हैं, जबकि 50 देशों को निमंत्रण भेजा गया है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी।
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