वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) के गाजा के लिये नवगठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (board of peace) में शामिल होने के पाकिस्तान के फैसले ने देश के राजनीतिक हलकों में तीव्र विरोध को जन्म दिया है। गुरुवार को संसद में भारी हंगामा हुआ, जिसमें विपक्षी दलों ने इस कदम की निंदा करते हुए इसे नेतृत्व की ट्रम्प से करीबी बढ़ाने की कोशिश बताया।
गाजा जैसे संवेदनशील मुद्दे से जुड़े मामले में पारदर्शिता की कमी और संसदीय अनुमोदन न लेने पर सवाल उठाते हुए, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (जेयूआई-एफ) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय महत्व की आवश्यकताओं के आधार पर विदेश नीति तैयार करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय दबाव के आधार पर देश की विदेश बनायी जा रही है।
यह कड़ी आलोचना ट्रंप के दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का औपचारिक रूप से अनावरण करने के कुछ ही घंटों बाद सामने आई, जहां 19 से अधिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने संस्थापना घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए, जिनमें पाकिस्तान भी शामिल था। उन्होंने यह भी घोषणा की कि 8 फरवरी को “काला दिन” के रूप में मनाया जाएगा, जिसकी वजह उन्होंने देश को बार-बार मिलने वाली राजनीतिक असफलताओं को बताया।
सीनेट में, विपक्ष के नेता अल्लामा राजा नासिर अब्बास ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “नैतिक रूप से गलत और अनुचित” बताया और तर्क दिया कि गाजा शांति समझौते में पाकिस्तान की भागीदारी किसी भी प्रकार के नैतिक औचित्य से रहित है, जिसके परिणामस्वरूप देश के लिए पहले से ही कठिन समय में कुछ गंभीर परिणाम सामने आएंगे। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष बैरिस्टर गोहर अली खान ने भी इस फैसले की आलोचना करते हुए प्रधानमंत्री के कथित एकतरफा कदम को अनुचित बताया।
नेशनल असेंबली को संबोधित करते हुए खान ने कहा कि सदन को दरकिनार कर दिया गया है और उन्होंने उन शर्तों और नियमों पर स्पष्टता की मांग की जिनके तहत पाकिस्तान ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हुआ था। यह स्वीकार करते हुए कि संयुक्त राष्ट्र ने जिन संगठनों से जुड़ने को अनिवार्य बनाया है, सरकार उनसे जुड़ सकती है। श्री खान ने कहा कि ‘बोर्ड ऑफ पीस’ संयुक्त राष्ट्र की संस्था नहीं है और इसलिए इसके लिए संसदीय विचार-विमर्श की आवश्यकता है।
पूर्व नेशनल असेंबली स्पीकर असद कैसर ने कहा कि पीटीआई ने इस फैसले से खुद को पूरी तरह से अलग कर लिया है। लग से, जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान के प्रमुख हाफिज नईमुर रहमान ने इस पहल को दृढ़ता से खारिज करते हुए गाजा ‘बोर्ड ऑफ पीस’ पर आरोप लगाया कि यह क्षेत्र में वास्तविक शांति लाने के बजाय केवल फिलिस्तीनी भूमि और संसाधनों पर कब्जा करने के उद्देश्य से बनाया गया एक और तंत्र है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फिलिस्तीन के लिए लगातार आवाज उठाई है और गाजा के पुनर्निर्माण का समर्थन करने और स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल हुआ है। चौधरी ने एकता का आह्वान करते हुए सांसदों से इस मुद्दे को राजनीतिक टकराव में बदलने के बजाय आम सहमति बनाने का आग्रह किया।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved