
नई दिल्ली । मतदाता सूची (Voter list) के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का कार्य अब सिर्फ भारत (India) तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अधिकांश लोकतांत्रिक देशों (Democratic countries) के चुनाव प्रबंधन निकायों (EMB) ने अपने यहां मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए इसी तरह का तरीका अपनाने पर बल दिया है। भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा ‘लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन’ पर आयोजित तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने आए 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों और 27 देशों के मिशन प्रमुख ने सर्वसम्मति से अपने यहां भी मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए अपनी-अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।
‘लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन पर भारत के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन’ (आईआईसीडीईएम-2026) के अंतिम दिन विभिन्न देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों ने ‘शुद्ध’ मतदाता सूची बनाने और हर मतदाता को फोटो पहचान पत्र देने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया है।
सम्मेलन के समापन सत्र में ‘दिल्ली घोषणा 2026’ को पढ़ते हुए भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इसमें शामिल सभी चुनाव प्रबंधन निकायों ने घोषणा पत्र के पांच स्तंभों पर एक साथ मिलकर काम करने का संकल्प लिया है जो ‘मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव संचालन, अनुसंधान और प्रकाशन, प्रौद्योगिकी के उपयोग और प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण से संबंधित हैं।
उन्होंने कहा कि सभी ने अपनी प्रगति की समय-समय पर समीक्षा करने का भी संकल्प लिया और 3, 4 और 5 दिसंबर 2026 को भारत अंतरराष्ट्रीय लोकतंत्र और चुनाव प्रबंधन संस्थान नई दिल्ली में दोबारा से मिलने का प्रस्ताव दिया, जिसे सभी ने स्वीकार किया। भारत मंडपम में तीन दिन तक विभिन्न सत्रों में भारत के निर्वाचन आयोग द्वारा एसआईआर पर गहन चर्चा हुई। सम्मेलन में शामिल सभी देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों ने ऐसे तरीके अपनाने पर जोर दिया।
शुद्ध मतदाता सूची लोकतंत्र की नींव
समापन सत्र में ज्ञानेश कुमार ने कहा, कानून के अनुसार सभी मतदाताओं के नाम वाली शुद्ध मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र की नींव है। निकायों को चुनावों के आसान और पारदर्शी संचालन के लिए सभी मतदाताओं को फोटो पहचान पत्र प्रदान करने का प्रयास करना चाहिए।
एक हजार से अधिक लोगों ने लिया हिस्सा
सम्मेलन में 42 देशों के चुनाव प्रबंधन निकायों के प्रमुखों/प्रतिनिधियों और 27 देशों के मिशन प्रमुखों सहित लगभग 1,000 लोगों ने भाग लिया। सम्मेलन में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के नेतृत्व में प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों व अन्य ने गहन विचार-विमर्श में योगदान दिया।
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