
नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय ने आंध्र प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (APSSDC) सीमेंस प्रोजेक्ट मामले में एक नई चार्जशीट दायर की है. इसमें कहा गया है कि कुछ आरोपियों ने सरकारी फंड को डायवर्ट किया गया था, लेकिन अपराध की कमाई को लॉन्डरिंग करने में मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की कोई भूमिका नहीं पाई गई.
पिछली YSRCP के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी ने सितंबर 2023 में इस मामले में नायडू को गिरफ्तार किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि इस योजना में अनियमितताओं के कारण राज्य के खजाने को 300 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. चंद्रबाबू नायडू ने राजामहेंद्रवरम सेंट्रल जेल में 50 से ज़्यादा दिन बिताए थे, इसके बाद आंध्र हाई कोर्ट ने उन्हें 31 अक्टूबर, 2023 को जमानत दे दी थी.
विजयवाड़ा की एक स्थानीय अदालत ने भी हाल ही में राज्य CID की तरफ से इस मामले में दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और नायडू के खिलाफ जांच बंद कर दी. ED का मामला CID की FIR पर आधारित है. अधिकारियों के मुताबिक, संघीय जांच एजेंसी ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कहा है कि उसकी जांच में इस मामले में अपराध की कमाई की लॉन्डरिंग में नायडू की कोई भूमिका नहीं पाई गई. इसलिए उन्हें उक्त शिकायत में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया. ED ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा कि अदालत ने 28 जनवरी को इस नई शिकायत का संज्ञान लिया.
स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoEs) के क्लस्टर स्थापित करना शामिल था, जिसकी कुल प्रोजेक्ट लागत 3,300 करोड़ रुपये अनुमानित थी. नई चार्जशीट आरोपी कंपनी, डिजाइनटेक सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (DTSPL), उसके MD विकास खानवेलकर, सीमेंस इंडस्ट्री सॉफ्टवेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के पूर्व MD सौम्याद्री शेखर बोस उर्फ सुमन बोस और उनके करीबी सहयोगियों मुकुल चंद्र अग्रवाल, सुरेश गोयल और कुछ दूसरे लोगों के खिलाफ दायर की गई है.
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved