खरी-खरी ब्‍लॉगर

चिराग यूं ही बुझते रहेंगे

जिस चिराग को अनुभव का तेल न मिले… जो चिराग ठोकरों की आग में न तपेे… जिस चिराग को चापलूसी की बाती रोशन करे… वो चिराग भला कब तक रोशन रहे… पासवान की हथेली का चिराग भी कुछ ऐसी ही कच्ची माटी और बुझी बाती के साथ रोशन होने की जिद कर रहा था… उसे […]

खरी-खरी ब्‍लॉगर

हम आत्मनिर्भरता की गाड़ी चलाएं… और आप टायर पंक्चर कर बहादुरी दिखाएं…

देश को आत्मनिर्भर बनाएंगे… अपना बनाएंगे… अपना खाएंगे… भूखे मर जाएंगे, पर किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे… नारे तो आपने खूब लगवाए… कसमें आपने खूब खिलवाईं… हम भी जोश-जोश में आपके साथ हो गए… चीन की होली जलाई… विदेशियत को ठोकर लगाई… कसम पूरी करने में हमने तो पूरी जान लगाई… लेकिन आपने यह […]

खरी-खरी

हर दर्द पर मरहम लगाया… आक्रोश की आग को स्याही बनाया… तब जाकर अग्निबाण ने स्वरूप पाया…

अग्निबाण का 45वें वर्ष में प्रवेश यह अखबार नहीं जुनून है… यह कलम की स्याही नहीं जमानेभर के दिलों का खौलता खून है… जहां लोग मायूस हो जाते हैं… आक्रोश से फडफ़ड़ाते हैं… व्यवस्थाओं पर गुर्राते हैं… मनमानी पर बौखलाते हैं… जुल्म और ज्यादती को सह नहीं पाते हैं… लेकिन कुछ कर नहीं पाते हैं, […]

खरी-खरी

अनाथों के नाथ… मरते मरीजों के लिए बन जाइए जगन्नाथ

    मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए पेंशन योजना का ऐलान करने के साथ ही बेसहारा हुए लोगों को नौकरी दिए जाने और काल के गाल में समाए सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को अनुकम्पा नियुक्ति में लगाने की घोषणा कर कई परिवारों पर टूटे गम के […]

खरी-खरी

मन का रावण जिन्दा रहेगा तो देश में राम मंदिर कैसे बनेगा…

राम का मंदिर बनवाया तो रावण का अहंकार क्यों अपनाया… एक नहीं अनेक सवालों से घिरी सरकार दिल्ली में पोस्टर लगाकर विरोध जताने वालों को जेल में डाल रही है तो पराजय की खीझ निकालते हुए ममता के मंत्रियों को जेल भिजवा रही है… जिस नारदा प्रकरण में नेता गिरफ्तार किए जा रहे हैं उसी […]

खरी-खरी

पलायन नहीं पराक्रम दिखाइए… अफसर की नहीं अंतरात्मा की आवाज पर ध्यान लगाइए… वरना वाकई में घर जाइए

  समय संयम और संघर्ष का….अफसर की नहीं, अंतरात्मा की आवाज सुनने का… रुदन को रोकने का… मौतों की आहट सुनकर भी नहीं जागे… अर्थियों की कतारें देखकर भी न पसीजे… अपनों के बिछुड़ते, सपनों के बिखरने पर उठी चीत्कारों से भी यदि कानों के पर्दे नहीं फटे तो आपकी इंसानियत मर चुकी है… मानवता […]

खरी-खरी

देश में दिल्ली ही नहीं है जनाब

  सारी आफतें दिल्ली में… सारी आंखें दिल्ली में… सारी सांसें दिल्ली को… कोटा बढ़ाओ… ऑक्सीजन पहुंचाओ… साधन बढ़ाओ… देश की राजधानी के दो करोड़ लोगों के लिए सौ करोड़ लोगों से नजरें चुराए सरकार से लेकर नेता और मीडिया से लेकर अदालतें अपनी नजरें अस्पतालों से लेकर श्मशानों तक पर लगाए बैठी हैं… लेकिन […]

खरी-खरी

जिंदगी के लिए जीरा…

  क्या कर रही है सरकार… जब देश को है करोड़ों की दरकार तब वैक्सीन है चंद हजार… ना मरते मरीजों के इलाज पर ध्यान लगाया… ना दवा, ना ऑक्सीजन, ना अस्पतालों का इंतजाम करवाया… मान लिया कोरोना की लहर और कहर का अंदाजा सरकार को लग नहीं पाया… लेकिन वैक्सीन तो पिछले साल ही […]

खरी-खरी

हार नहीं… हाय लगी

  जब सारा देश कर रहा था चीत्कार, तब देश के मुखिया कर रहे थे चुनाव प्रचार… क्या मुखिया, क्या मुख्यमंत्री… क्या नेता, क्या अधिकारी… क्या सरकार, क्या जिम्मेदार… देशभर की वेदना पर मरी हुई संवेदनाओं की ऐसी निर्ममता देश ने देखी और भुगती जो कल्पना से बाहर हैं… बिखरी हुई लाश के बीच एक […]

खरी-खरी

सरकार तो सरकार… जनता कौन सी समझदार…

  यह देश भी बड़ा अजीब हैं… सोते हैं तो सब सोते हैं… और रोते हैं तो सारे रोते हैं… जब देश में सरकार वैक्सीनेशन के लिए योजना बना रही थी… बुजुर्गों को पहले लगा रही हैं थी… उम्र के मानकों के हिसाब से हिफाजत की तारीखें बता रही थी… प्रशासन हाथ जोड़ रहा था… […]