
नई दिल्ली. भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) के लिए आज का दिन बेहद निराशाजनक रहा। वैश्विक स्तर पर नकारात्मक रुझानों और निवेशकों की मुनाफावसूली (Profit-taking) के कारण बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। 8 जून 2026 के कारोबारी सत्र में ‘रिस्क-ऑफ’ (जोखिम से बचने) के माहौल के बीच प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) धड़ाम हो गए। इस बिकवाली ने न केवल भारतीय बाजार को अपनी चपेट में लिया, बल्कि एशियाई और यूरोपीय बाजारों में भी भारी उथल-पुथल मचा दी है।
सेंसेक्स और निफ्टी का ताजा हाल
बाजार में सुबह से ही बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। सेंसेक्स: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का प्रमुख इंडेक्स सेंसेक्स कारोबार के दौरान 700 से अधिक अंक तक लुढ़क गया। यह 645.51 अंकों (-0.86%) की गिरावट के साथ 73,597.83 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
निफ्टी: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी भी 199.80 अंक (-0.86%) टूटकर 23,166.90 पर आ गया। भारी बिकवाली के कारण निफ्टी एक समय 23,150 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से भी नीचे फिसल गया था।
सेक्टोरल इम्पैक्ट: कहां हुई बिकवाली, कहां मिला सहारा?
बाजार का सेक्टोरल दायरा काफी कमजोर रहा और निफ्टी के ज्यादातर इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।
सबसे ज्यादा नुकसान: आईटी (IT), रियल्टी, मेटल और ऑटो सेक्टर में निवेशकों ने जमकर मुनाफावसूली की, जिससे ये सेक्टर्स सबसे बड़े लूजर साबित हुए।
डिफेंसिव सेक्टर्स का बचाव: इस भारी चौतरफा गिरावट के बीच, फार्मा, हेल्थकेयर, मिडकैप हेल्थकेयर और मीडिया जैसे ‘डिफेंसिव’ सेक्टर्स ने अपनी मजबूती दिखाई और मामूली बढ़त के साथ बाजार को थोड़ा सहारा देने की कोशिश की।
ग्लोबल मार्केट्स में मची भारी तबाही
घरेलू बाजार में इस गिरावट का मुख्य कारण विदेशी बाजारों में मची भारी उथल-पुथल है। दुनिया भर के कई प्रमुख शेयर बाजारों में आज भारी गिरावट दर्ज की गई:
एशियाई बाजार पस्त: जापान के निक्केई 225 फ्यूचर्स में 4.2% की भारी गिरावट आई, जबकि वहां का टोपिक्स इंडेक्स 2.7% गिर गया। इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 फ्यूचर्स 1.4%, हांगकांग का हैंग सेंग 1.3% और चीन का शंघाई कंपोजिट 1% टूट गया।
यूरोपीय और अमेरिकी बाजार: यूरोपीय बाजारों में भी निराशा है, जहां यूरो स्टॉक्स 50 फ्यूचर्स 1.1% गिर गया। वहीं, अमेरिकी बाजार के एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा है।
कुल मिलाकर शेयर बाजार का मौजूदा रुख बेहद सतर्क बना हुआ है। अलग-अलग सेक्टर्स में चुनिंदा खरीदारी के मुकाबले बाजार में हावी बिकवाली का दबाव कहीं अधिक है। जब तक वैश्विक बाजारों से स्थिरता के संकेत नहीं मिलते, तब तक निवेशकों को अस्थिरता के बीच संभलकर ट्रेड करने की सलाह दी जाती है।
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