
अयोध्या: अयोध्या के राम मंदिर में कथित दान चोरी के मामले के तूल पकड़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले हफ्ते शनिवार को मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल का गठन कर दिया है. 3 सदस्यीय एसआईटी टीम राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित आरोपों की जांच करेगी. राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने एसआईटी गठित किए जाने पर कहा कि यह जिस स्पीड में किया गया है वो अपने आप में प्रशंसा की बात है. जांच में किसी तरह की कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी.
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी का गठन किया गया. यह टीम तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों के संबंध लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगा. जांच टीम में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत (IAS), पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. (IPS) और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को रखा गया है.
मंदिर में चढ़ावा गबन के आरोपों पर नृपेंद्र मिश्र ने कहा, “जिस गति से एसआईटी टीम बनाने का फैसला लिया गया है वह अपने में प्रशंसा की बात है. इसका फैसला शनिवार को लिया गया, कल रविवार था. ऐसे में टीम आज से अपने काम की शुरुआत करेगी.”
काम शुरू करने से पहले टीम की सीएम योगी से मुलाकात पर उन्होंने कहा, “मुझे ये भी पता लगा है कि SIT की टीम ने शीर्ष स्तर पर मार्गदर्शन हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट करने का अनुरोध किया है. मुलाकात के बाद तत्काल बाद वो यहां पर आकर अपना काम शुरू कर देंगे.” उन्होंने कहा, “मैं यह नहीं समझता कि किसी प्रकार की ढिलाई बरती जाएगी.”
नृपेंद्र मिश्रा ने जांच के बारे में कहा, “इसके कई पहलू है. पहला तो यही कि इसका एक आपराधिक पहलू है दूसरा भविष्य में सुधार का पहलू है. यह दोनों जब हो जाएगा तब ही हम श्रद्धालुओं का विश्वास जीत सकेंगे. इसके लिए ट्रस्ट ने पूरी तरीके से अपना मन बना लिया है. साथ ही SIT जितना भी सहयोग चाहेगी, उतना दिया जाएगा.” उन्होंने कहा, “जिला प्रशासन से मेरी कल बात हुई है उन्होंने भी पूरी तरीके से जो भी हो सकता है, सहयोग की बात कही है. यह सामूहिक टीम का प्रयास है.
इससे पहले अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में कथित दान चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीएम योगी से एसआईटी गठित किए जाने का अनुरोध किया था. ट्रस्ट के अनुसार अफवाहों पर रोक लगाने और पूरे मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए गहन जांच जरूरी है. यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है.
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