
नई दिल्ली/भोपाल । वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजयसिंह (Senior Congress leader Digvijaysingh) ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर (On National Education Policy) व्यापक चर्चा की जाए (Comprehensive Discussion should be Held) ।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सोमवार को कहा कि “सिर्फ परीक्षा का पेपर लीक होने के खिलाफ सख्त कानून बनाने से देश में परीक्षा से जुड़े संकट का समाधान नहीं होगा। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर व्यापक चर्चा की मांग की। सिंह का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने की घोषणा के एक दिन बाद आया है। इस टास्क फोर्स की अध्यक्षता यूआईडीएआई के पूर्व चेयरमैन नंदन नीलेकणि करेंगे और यह देश की परीक्षा प्रणाली को लीक-प्रूफ और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाने के उपाय सुझाएगी। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार संसद में पेपर लीक रोकने के लिए एक सख्त कानून लाएगी।
इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह के ऑफिस ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “पेपर लीक कानून को सख्त बनाने से समस्या हल नहीं होगी। आपको संसद में ‘नई शिक्षा नीति 2020’ पर पूरी तरह से चर्चा करनी चाहिए और उससे पहले, देश के सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों के साथ शिक्षा नीति पर चर्चा होनी चाहिए। अगर आपने संसद में ‘नई शिक्षा नीति 2020’ पर चर्चा की होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।” एक और पोस्ट में दिग्विजय सिंह कहा, “भारत जैसे देश में सत्ता का विकेंद्रीकरण जरूरी है, न कि केंद्रीकरण। शिक्षा को पूरी तरह से भारतीय संविधान की राज्य सूची में रखा जाना चाहिए।”
खास बात यह है कि रविवार को पीएम मोदी ने कहा कि नीलेकणि की अगुवाई वाला एक्सपर्ट पैनल परीक्षा प्रणाली को ज़्यादा पारदर्शी और टेक्नोलॉजी पर आधारित बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगा। प्रस्तावित समिति में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और सीनियर ब्यूरोक्रेट अमृत लाल मीणा समेत कई लोग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है और संसद में पेपर लीक रोकने के लिए एक कड़ा कानून लाएगी। यह ताजा बयानबाजी नीट -यूजी 2026 पेपर लीक विवाद को लेकर मचे राजनीतिक हंगामे के बीच सामने आई है।
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