img-fluid

न्याय व्यवस्था का केंद्रीय आधार बन गई है मध्यस्थता – मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत

August 02, 2026


जयपुर । मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant) ने कहा कि मध्यस्थता (Mediation) न्याय व्यवस्था का केंद्रीय आधार बन गई है (Has become Central Pillar of Judicial System) ।


  • राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, कॉमनवेल्थ लॉयर्स एसोसिएशन, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन तथा निवारण-मेडिएटर्स ऑफ सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में होटल द ललित, जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय “कॉमनवेल्थ पीस मेडिएशन कॉन्फ्रेंस-2026 : पीस मेडिएशन एंड द रूल ऑफ लॉ” के दूसरे दिन मध्यस्थता को न्याय प्रणाली का अभिन्न अंग बनाने, विवादों के त्वरित एवं सौहार्दपूर्ण समाधान तथा न्याय तक सरल और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ। सम्मेलन में भारत तथा कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीशों, विधि विशेषज्ञों एवं मध्यस्थता विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए मध्यस्थता को भविष्य की न्याय व्यवस्था की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताया।

    भारत के मुख्य न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अपने मुख्य उद्बोधन में कहा कि मध्यस्थता आज केवल वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली नहीं रह गई है, बल्कि न्याय व्यवस्था का ऐसा महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है जिसकी उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि समाज, व्यापार, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच न्याय प्रणाली को भी अधिक संवेदनशील, सहभागी और व्यवहारिक बनाने की आवश्यकता है, जिसमें मध्यस्थता अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी का उद्देश्य प्रायः विवाद का निर्णय करना होता है, जबकि मध्यस्थता का उद्देश्य विवाद के मूल कारणों को समझना और सभी पक्षों के लिए स्वीकार्य समाधान विकसित करना है। यही कारण है कि आज विश्वभर में मध्यस्थता को न्याय तक सरल, त्वरित एवं कम खर्चीली पहुंच उपलब्ध कराने वाले प्रभावी माध्यम के रूप में स्वीकार किया जा रहा है।

    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि स्थायी लोक अदालतें, सुलह, पारंपरिक पंचायत व्यवस्था तथा सर्वोच्च न्यायालय एवं बार एसोसिएशनों के सहयोग से विकसित विभिन्न वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि न्याय केवल निर्णय देने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि समाज में विश्वास, संवाद और सामंजस्य स्थापित करने का माध्यम भी होना चाहिए। तकनीकी सत्रों में मध्यस्थता के विविध आयामों पर हुआ मंथन—अध्यक्षीय सत्र के समापन के बाद निवारण की महासचिव नंदिनी गोरे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इसके पश्चात कॉमनवेल्थ देशों के न्यायाधीशों एवं विधि विशेषज्ञों की सहभागिता से मध्यस्थता के विभिन्न आयामों पर विषयगत तकनीकी सत्र आयोजित किए गए।

    दूसरे दिन के सत्र का शुभारंभ गणमान्य अतिथियों के स्वागत एवं राष्ट्रगान के साथ हुआ। राजस्थान के महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि कानून और न्याय स्थिर अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि समय के साथ विकसित होने वाली व्यवस्थाएं हैं। उन्होंने सामान्य मध्यस्थता और शांति मध्यस्थता के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि जहां सामान्य मध्यस्थता विशिष्ट विवादों का समाधान करती है, वहीं शांति मध्यस्थता समाजों और देशों के बीच विश्वास, संवाद और सहयोग को निरंतर सुदृढ़ करने की प्रक्रिया है। उन्होंने इस सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने वाली परिवर्तनकारी यात्रा की शुरुआत बताया।

    राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय डॉ. न्यायमूर्ति पुष्पेन्द्र सिंह भाटी ने मध्यस्थता के भावनात्मक और मानवीय प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक बालक की मार्मिक कहानी साझा की, जिसका अपने माता-पिता के मध्यस्थता के माध्यम से पुनर्मिलन होने के बाद परिवार पुनः एकजुट हो सका। उन्होंने कहा कि असफल मध्यस्थता का परिणाम कभी-कभी दीवानी मुकदमे में हार-जीत से भी अधिक गंभीर हो सकता है। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि विश्वास, संवेदनशीलता और मानवीय मूल्यों पर आधारित व्यवस्था है तथा शांति और मध्यस्थता एक-दूसरे के पूरक हैं।

    राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति संजीव प्रकाश शर्मा ने बताया कि राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जून 2026 में पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीशों के लिए 40 घंटे का ऐतिहासिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें 38 पूर्व न्यायाधीशों ने भाग लिया। उन्होंने मीडिएशन फॉर द नेशन 10 एवं 20 कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए प्री-आर्बिट्रेशन मीडिएशन को अनिवार्य बनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था में, जहां देशों के बीच व्यापार और कानूनी प्रक्रियाएं अधिक जटिल होती जा रही हैं, वहां मध्यस्थता विवाद समाधान का सबसे त्वरित, व्यावहारिक एवं भविष्य उन्मुख माध्यम बनकर उभर रही है।

    न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने मध्यस्थता को पहला विकल्प बनाने की आवश्यकता बताई—भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश माननीय न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने कहा कि मध्यस्थता को विवाद समाधान का अंतिम विकल्प नहीं, बल्कि पहला स्वाभाविक विकल्प बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुकदमेबाजी जहां प्रायः जीत और हार तय करती है, वहीं मध्यस्थता दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करते हुए संतुलित और स्वीकार्य समाधान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न्याय को अधिक मानवीय, सहभागी एवं प्रभावी बनाती है।

    Share:

  • केंद्र एवं राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए प्रतिबद्ध - केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल

    Sun Aug 2 , 2026
    बीकानेर । केंद्रीय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल (Union Minister of State Arjun Ram Meghwal) ने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार (Central and State Governments) ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए (To Expanding basic amenities in Rural Areas) प्रतिबद्ध है (Are Committed) । बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ को विकास की नई सौगात […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved