जकार्ता। इंडोनेशिया (Indonesia) के सुंडा जलडमरूमध्य में स्थित अनाक क्राकाटाऊ ज्वालामुखी (krakatau volcano) रविवार सुबह अचानक जोरदार तरीके से सक्रिय हो गया। लगातार दो विस्फोटों के बाद ज्वालामुखी (Volcano) से राख और धुएं का विशाल गुबार उठा, जिसकी ऊंचाई करीब 50 हजार फीट यानी 15 किलोमीटर तक पहुंच गई। समुद्र के बीच उठते काले गुबार की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। विस्फोट की तीव्रता देखकर कई लोगों ने इसकी तुलना परमाणु विस्फोट जैसे नजारे से की।
ज्वालामुखी से निकली राख का असर आसपास के इलाकों के साथ-साथ विमान सेवाओं पर भी पड़ा। राख के बादल हवाई मार्गों तक पहुंचने के कारण पश्चिमी इंडोनेशिया के कई एयरपोर्ट पर उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ। सोएकार्नो-हट्टा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जकार्ता समेत कुल आठ एयरपोर्ट इससे प्रभावित हुए। अधिकारियों के मुताबिक करीब 1,558 उड़ानों पर देरी, रद्दीकरण या रूट में बदलाव का असर पड़ा, जिससे लगभग 1.7 लाख यात्री प्रभावित हुए।
रविवार को अनाक क्राकाटाऊ में दो प्रमुख विस्फोट दर्ज किए गए। इनमें पहला करीब 30 सेकंड और दूसरा लगभग 16 सेकंड तक चला। विस्फोट के दौरान राख और गर्म पदार्थ तेजी से ऊपर उठा और बाद में तेज हवाओं के साथ दूर तक फैल गया।
ज्वालामुखीय राख विमानन के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है। राख के महीन कण विमान के इंजन और अन्य तकनीकी प्रणालियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से विमानन अधिकारियों को कई उड़ानों का संचालन रोकने, उनमें बदलाव करने या दूसरे एयरपोर्ट की ओर मोड़ने जैसे कदम उठाने पड़े।
राख के फैलने का असर सामान्य जनजीवन पर भी दिखाई दिया। कुछ इलाकों में स्कूलों की गतिविधियां रोककर ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प अपनाया गया। मछुआरों को समुद्र में जाने से बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से बाहर निकलते समय मास्क पहनने और राख के सीधे संपर्क से बचने को कहा है, क्योंकि इससे आंखों और सांस संबंधी परेशानी हो सकती है।
राख को जल्द नीचे लाने के लिए प्रशासन मौसम की परिस्थितियों के आधार पर क्लाउड सीडिंग की संभावना पर भी काम कर रहा है।
विस्फोट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने अनाक क्राकाटाऊ के आसपास करीब 3 किलोमीटर के क्षेत्र में लोगों और नावों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। समुद्री जहाजों को भी इस क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी गई है। ज्वालामुखी को फिलहाल लेवल-3 हाई अलर्ट पर रखा गया है।
हालांकि अधिकारियों के अनुसार मौजूदा विस्फोट से किसी बड़े सुनामी खतरे की जानकारी नहीं है। आपदा प्रबंधन एजेंसियों ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
अनाक क्राकाटाऊ का अर्थ है ‘क्राकाटाऊ का बच्चा’। यह उसी ज्वालामुखीय क्षेत्र में विकसित हुआ है, जहां वर्ष 1883 में क्राकाटाऊ का बेहद विनाशकारी विस्फोट हुआ था। उस घटना के बाद आई सुनामी ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और करीब 36 हजार लोगों की मौत हुई थी।
पुराने ज्वालामुखी क्षेत्र में बाद में समुद्र के बीच एक नया ज्वालामुखीय द्वीप उभरा, जिसे अनाक क्राकाटाऊ नाम दिया गया। तब से यह समय-समय पर सक्रिय होता रहा है।
अनाक क्राकाटाऊ की खतरनाक प्रकृति वर्ष 2018 में भी सामने आई थी। उस दौरान ज्वालामुखी का एक हिस्सा समुद्र में ढह गया था, जिससे समुद्र में तेज हलचल पैदा हुई और जावा तथा सुमात्रा के तटीय इलाकों में सुनामी पहुंची। इस आपदा में 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
इसी पुराने अनुभव को देखते हुए इस बार भी वैज्ञानिक और प्रशासन ज्वालामुखी की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे हैं। फिलहाल बड़े पैमाने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश रोक दिया गया है।
अनाक क्राकाटाऊ की गतिविधि जुलाई से ही बढ़ी हुई बताई जा रही थी। रविवार के विस्फोट को मौजूदा सक्रियता के दौर की सबसे मजबूत घटनाओं में माना जा रहा है। अब वैज्ञानिक यह पता लगाने में जुटे हैं कि ज्वालामुखी की गतिविधि आगे और तेज होती है या धीरे-धीरे शांत पड़ती है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती ज्वालामुखीय राख का फैलाव और उससे विमानन सेवाओं पर पड़ रहा असर है। इंडोनेशियाई अधिकारी हवा में राख की स्थिति और ज्वालामुखी की गतिविधियों की लगातार निगरानी कर रहे हैं।
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