बाराबंकी। नेपाल (Nepal) से आए पानी के कारण सरयू नदी (Saryu River) में आई तेज धारा ने बाराबंकी के रामनगर तहसील क्षेत्र (Managar Tehsil area) के हेतमापुर में भारी तबाही मचा दी है। नदी के तेज कटान में मस्जिद, शंकरजी का मंदिर (Mosque, Lord Shankar, temple) और करीब 10 मकान समा गए। खेतों और आबादी को काटती हुई नदी अब बाबा नारायण दास की तपोस्थली की ओर बढ़ रही है। मंदिर के निचले हिस्से का लिंटर भी नदी की चपेट में आ चुका है।
कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड की ओर से नदी में बोल्डर-पत्थर और ईंटों से भरी बोरियां डाली जा रही हैं, लेकिन तेज बहाव के सामने ये इंतजाम भी टिक नहीं पा रहे हैं। खतरा बढ़ता देख कई ग्रामीण अपने पक्के मकान खुद तोड़कर गृहस्थी का सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। पूरे गांव में अफरातफरी का माहौल है।
रात में अचानक तेज हुआ कटान
हेतमापुर में शनिवार शाम तक सरयू नदी शांत थी। रात करीब दो बजे जलस्तर बढ़ने के साथ कटान ने अचानक रफ्तार पकड़ ली। सबसे पहले कगार पर बनी मस्जिद नदी की धारा में समा गई। इसके कुछ देर बाद पास स्थित शंकरजी का मंदिर भी नदी में बह गया। इसके बाद कटान बाबा नारायण दास की तपोस्थली की ओर बढ़ने लगी और मंदिर के निचले हिस्से का लिंटर भी नदी में समा गया।
मंदिर को बचाने के लिए बाढ़ खंड ने ट्रालियों से बोल्डर-पत्थर और बोरियों में भरी ईंटें नदी में डलवाईं, लेकिन तेज धारा के कारण यह प्रयास प्रभावी नहीं हो सके।
ग्रामीण खुद तोड़ रहे अपने मकान
कटान के मुहाने पर पहुंचे मकानों को बचाने की उम्मीद छोड़ कई ग्रामीणों ने खुद ही उन्हें तोड़ना शुरू कर दिया। जिन घरों में वर्षों से लोगों की गृहस्थी थी, उनकी दीवारें रविवार को ग्रामीण अपने हाथों से गिराते नजर आए। गांव में चीख-पुकार और अफरातफरी का माहौल बना रहा।
पशु अस्पताल भी कटान की चपेट में
सरयू का कटान अब पशु अस्पताल तक पहुंच गया है। अस्पताल की बाउंड्रीवाल नदी में समा चुकी है और भवन की ओर तेजी से कटान हो रहा है। खतरे को देखते हुए अस्पताल को खाली करा दिया गया है। जरूरी सामान भी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा रहा है।
अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा
कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए रविवार को एडीएम निरंकार सिंह, एसपी अर्पित विजय वर्गीय, एएसपी विवेक तिवारी और सीएमओ डॉ. रंजन गौतम समेत कई अधिकारी हेतमापुर पहुंचे। एसडीएम आकांक्षा गुप्ता और तहसीलदार विपुल सिंह सुबह से ही मौके पर मौजूद रहे और स्थिति का जायजा लेते रहे।
इन ग्रामीणों के मकान नदी में समाए
जगदीश वर्मा, रामतेज, मैकू, विनोद, संतोष, ब्रजेश, शिव नारायण, भिशोक, राम किशोर, श्रीराम, राजा राम, गीता देवी, छोटू, इश्तियाक, ननकू और कोमल के मकान नदी में समा गए हैं।
इन मकानों पर भी मंडरा रहा खतरा
रहमत, अहमद, सलीम, मुन्ना, अय्यूब, इरफान, यूनुस, भड़काऊ, बकरीदी, रियाज, लवकुमार, मंशाराम, शोभाराम और बाबा दीन समेत कई ग्रामीणों के मकान भी कटान के मुहाने पर हैं।
18 साल में पहली बार इतनी भयावह स्थिति
ग्रामीणों के मुताबिक हेतमापुर में रविवार जैसी भयावह कटान पिछले 18 वर्षों में नहीं देखी गई। पशु अस्पताल की ओर आबादी तेजी से कटती जा रही है। मस्जिद के पूरब नदी करीब पांच बीघा खेती योग्य जमीन भी अपने साथ बहा ले गई है। इससे आबादी पर खतरा और बढ़ गया है।
पूरनपुर में सात मकान और दो गायें बहीं
सरयू के दूसरे छोर पर बसे पूरनपुर गांव में भी शनिवार रात कटान ने तबाही मचाई। यहां रामानंद, सुरेश, राकेश, रामजतन, राज कुमार, कमला प्रसाद और मदन लाल के मकान नदी में समा गए। मदन लाल के घर में बंधी दो गायें भी मकान के साथ नदी में बह गईं।
फक्कड़, खुशीराम, भोला, दशरथ और शिवशंकर समेत कई अन्य ग्रामीणों के मकान भी कटान के मुहाने पर हैं। मकान गंवाने वाले परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
प्रशासन ने शुरू कराया राहत कार्य
एसडीएम रामनगर आकांक्षा गुप्ता के अनुसार, हेतमापुर में मस्जिद, शंकरजी मंदिर और करीब 10 मकान नदी में समा चुके हैं। बाढ़ खंड मंदिर को बचाने का प्रयास कर रहा है। प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है और उनके लिए भोजन की व्यवस्था भी कराई गई है। प्रशासन की टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
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