नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चुनाव आयोग (EC) को समयसीमा में फैसला लेने का निर्देश दिया है। इस आदेश पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party) ने तंज कसा है। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने व्यंग्य करते हुए कहा कि चुनाव आयोग को इस मामले में कम से कम एक साल का समय दिया जाना चाहिए था।
दरअसल, TMC के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच पार्टी के नाम और ‘फूल और घास’ वाले चुनाव चिह्न को लेकर विवाद चल रहा है। चुनाव आयोग ने 18 सितंबर को अंतरिम व्यवस्था के तहत मूल पार्टी के नाम और आरक्षित चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी। इसके बाद दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते में दलीलें पूरी करने को कहा
सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के समक्ष अपनी दलीलें और जरूरी दस्तावेज दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। इसके बाद चुनाव आयोग को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के तीन महीने के भीतर विवाद पर फैसला करने का निर्देश दिया गया है। इस तरह पूरी प्रक्रिया के लिए प्रभावी तौर पर करीब चार महीने की समयसीमा तय हुई है।
पीठ ने कहा कि दोनों पक्ष चार सप्ताह के भीतर अपने हलफनामे, अतिरिक्त हलफनामे और अन्य जरूरी सामग्री रिकॉर्ड पर रखें। इसके बाद चुनाव आयोग मामले पर निर्णय लेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई असाधारण कठिनाई सामने आती है तो आयोग दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।
चुनाव आयोग ने मांगा था छह महीने का समय
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसे विवादों में बड़ी संख्या में दस्तावेज और हलफनामे जमा होते हैं, जिनकी जांच में समय लगता है। आयोग की ओर से मामले का फैसला करने के लिए छह महीने का समय मांगा गया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने छह महीने की मांग स्वीकार नहीं की। पीठ ने तीन महीने की अवधि को पर्याप्त माना।
क्या है पूरा विवाद?
TMC में संगठनात्मक विवाद के बाद दो गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने विवाद का अंतिम निपटारा होने तक दोनों गुटों को मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चिह्न के इस्तेमाल से रोकते हुए अंतरिम तौर पर अलग-अलग नाम और प्रतीक दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इसी विवाद के अंतिम निपटारे की समयसीमा से जुड़ा है। अब दोनों पक्षों को चार सप्ताह में चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष पूरा करना होगा और उसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर अपना फैसला देना होगा।
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