
इस्लामाबाद। पाकिस्तान (Pakistan) में इस समय पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran khan) चर्चा का विषय बने हुए हैं। रावलपिंडी की सैन्य ताकत द्वारा इमरान खान की पार्टी को खत्म करने की पूरी कोशिश की जा चुकी है। लेकिन इसके बाद भी पार्टी कार्यकर्ता अभी भी सक्रिय हैं। लंबे समय के बाद इमरान खान (Imran khan) के लिए उन्होंने पहले 27 सितंबर को राजधानी में मार्च करने का ऐलान किया है, बाद में 4 अक्तूबर तक इसे टाल दिया गया। पाकिस्तान सरकार और सैन्य प्रशासन ने इस मार्च को रोकने के लिए भी अपनी पुराना हथकंडा ही अपनाया है। पूरे इस्लाबाद को किलाबंद कर दिया गया है। सीमाओं पर हजारों की संख्या में पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स की तैनाती कर दी गई है।
इमरान खान के समर्थकों द्वारा इस मार्च को आगे टालकर भले ही शरीफ सरकार (Sharif government) और मुनीर को थोड़ी राहत दी गई है, लेकिन आज भी सवाल सबसे बड़ा यही है कि आखिर अपने नेताओं को जेल के अंदर की खत्म कर देने वाली पाकिस्तानी सेना इमरान खान का मिटाने में असमर्थ क्यों है? आखिर ऐसा क्या है, जो सब कुछ करने के बाद भी आसिम मुनीर (Asim Munir) और शहबाज शरीफ, इमरान खान को तोड़ने में समर्थ नहीं हो पाए हैं? आज भी पाकिस्तान के लाखों लोग अपने नेता कि लिए जान देने के लिए तैयार हैं। पूरी दुनिया की नजर इस केस पर है कि आखिर इमरान खान जेल से कब रिहा होते हैं।
इस्लामाबाद को किया गया किलेबंद
पाकिस्तान में इमरान खान पिछले लगभग तीन साल से जेल में मौजूद हैं। रावलपिंडी सैन्य प्रशासन और अमेरिका पर सीधा हमला बोलने वाले इमरान खान के सब्र के पीछे कई कारण नजर आते हैं। वह एक ऐसे नेता हैं, जिनके चलते पाकिस्तानी पंजाब की जनता ने सैन्य प्रशासन के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया था। इमरान खान के इस सब्र के पीछे कई बड़े कारण हैं। आइए जानते हैं कि कैसे क्रिकेट और ग्लैमर का पाकिस्तानी बादशाह आज जेल में कैद है।
इमरान खान 80 और 90 के दशक में पाकिस्तानी क्रिकेट का एक जाना-पहचाना नाम थे। 1992 में पाकिस्तान को एक मात्र वनडे इंटरनेशनल वर्ल्डकप में जीत दिलाने के बाद वह अपनी लोकप्रियता के शिखर पर पहुंच गए। निजी जीवन में चल रही उठा-पटक के बीच इमरान खान ने पाकिस्तान के लोगों के लिए काम करने की शुरुआत की। उन्होंने लाहौर में अपनी मां शौकत खान्नुम के नाम पर एक कैंसर हॉस्पिटल बनवाया, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। लगातार जमीनी स्तर पर काम करते हुए इमरान खान ने 1996 में अपनी पार्टी पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ को लॉन्च किया। लेकिन उन्हें शुरुआत में ज्यादा सफलता नहीं मिली।
इमरान खान का राजनैतिक उदय
इस्लामाबाद की राजनीति पर उस वक्त शरीफ और भुट्टो-जरदारी परिवार का कब्जा था। रही सही कसर परवेज मुशरर्फ के सैन्य तानाशाही शासन काल ने पूरी कर दी। यूं कहें तो इमरान खान के राजनीतिक करियर को पनपने के लिए ज्यादा जगह ही नहीं मिली। इसके बाद बदलते पाकिस्तानी राजनीति के घटनाक्रम में नवाज शरीफ को एक बार फिर से गद्दी पर बैठाया। आर्मी के साथ शुरुआत में उनके संबंध ठीक रहे लेकिन धीरे-धीरे यह चीजें बदलने लगी। इसी बीच इमरान खान का पाकिस्तान की राजनीति के केंद्र में उबरना शुरू हो गया। विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्तान में भुट्टो-जरदारी और शरीफ परिवार से तंग आ चुके रावलपिंडी सैन्य तंत्र ने इमरान खान पर दांव खेला। इसके बाद 2018 में सत्ता में आ गए।
सैन्य ताकत से टकराव और इमरान खान का पतन
इमरान खान ने लगभग 4 साल तक रावलपिंडी के साथ मिलकर सत्ता चलाई। तमाम मतभेदों के बीच भी वह सत्ता चलाने में सफल रहे। लेकिन इसके बाद चीजें बदलने लगीं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच इमरान खान का रूस जाना और सीधे तौर पर अमेरिका को चुनौती देना उनके लिए खतरे की घंटी साबित हुआ। पाकिस्तानी संसद में अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद उन्हें सत्ता से हटना पड़ा और बाद में उन्हें गिरफ्तार करके जेल में डाल दिया गया। और एक बार फिर पाकिस्तान के एक प्रधानमंत्री अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही सत्ता को छोड़ने के लिए मजबूर हो गया।
आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ ने इमरान खान को कि मिटाने को कोशिश
इमरान खान केवल एक राजनीतिक नाम नहीं थे। वह पाकिस्तान की क्रिकेट का एक बड़ा नाम भी थे। इसलिए उन्हें रास्ते से हटाना पाकिस्तान के सैन्य तंत्र के लिए भी आसान नहीं था। पाकिस्तान की सरकार ने उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म करने के लिए 2024 आम चुनाव से पहले पीटीआई को खत्म कर दिया। इसके बाद भी जब चुनाव हुए तो पीटीआई की तरफ से समर्थित उम्मीदवार किसी भी पार्टी से ज्यादा वोट लेकर आए।
इमरान खान के समर्थकों ने वह कर दिखाया, जो पाकिस्तान में पहले इतने बड़े स्तर पर नहीं देखा गया। इमरान खान के समर्थकों ने न केवल सरकारी इमारतों को निशाना बनाया, बल्कि कराची में पाकिस्तानी कॉर्प्स कमांडर के घर को भी निशाना बनाया। कई सैन्य इमारतों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि, इसके बाद पाकिस्तान की सेना ने अपना पुराना हथकंडा अपनाते हुए समर्थकों पर जमकर कहर बरसाना शुरू कर दिया। इसमें कई लोगों की मौत हुई।
वर्तमान में भले ही इमरान खान जेल में हों, लेकिन पाकिस्तान की राजनीति का सबसे चर्चित चेहरा वही है। शहबाज शरीफ भले ही पाकिस्तान की सत्ता में बैठे हुए हैं लेकिन इमरान खान के समर्थक उनकी एक आवाज पर इस्लामाबाद को घेरने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तान में इस समय शायद ही कोई इमरान खान के कद का नेता हो, जो पिछले तीन साल से जेल में है इसके बाद भी इस्लामाबाद को किलेबंद होने के लिए मजबूर कर देता है।
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