
पुणे। महाराष्ट्र में सूखे और पानी की कमी से जूझ रहे किसानों की समस्याएं जानने के लिए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार शुक्रवार को सूखाग्रस्त इलाकों के दौरे पर निकले। पुणे जिले की पुरंदर तहसील में उन्होंने ग्रामीणों और किसानों से मुलाकात की। पवार ने किसानों को भरोसा दिलाया कि फसलों को हुए नुकसान और पानी की किल्लत का मुद्दा वह राज्य सरकार के सामने उठाएंगे।
पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की 358 तहसीलों में से 265 में सूखा घोषित किया है। हालांकि, कई अन्य इलाकों में भी पानी की गंभीर कमी और फसलों को नुकसान पहुंचने की स्थिति है। उन्होंने इसी सप्ताह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर मांग की थी कि सूखे की मार झेल रहे बाकी पात्र इलाकों को भी इस घोषणा में शामिल किया जाए।
किसानों से बातचीत के दौरान शरद पवार ने कहा कि उनके सामने सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगर बारिश नहीं हुई तो वे क्या करेंगे। मौजूदा फसलों को बचाना जरूरी है और किसानों तक तत्काल राहत पहुंचनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरंदर उन इलाकों में शामिल है, जहां सूखे की स्थिति काफी गंभीर है। ऐसे में राहत के फैसले लेते समय सरकार को जमीनी हालात को ध्यान में रखना चाहिए।
शरद पवार ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस के सामने किसानों की समस्याएं रखी हैं और कई मांगें की हैं। इनमें सहकारी, राष्ट्रीयकृत और शहरी सहकारी बैंकों के साथ ऋण समितियों से खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए लिए गए कर्ज की 100 प्रतिशत माफी शामिल है। इसके अलावा, रोजगार गारंटी योजना के नियमों में ढील देने, पीने के पानी और पशुओं के लिए पानी उपलब्ध कराने को टैंकर भेजने तथा सूखाग्रस्त इलाकों में बिल नहीं भर पाने के कारण किसानों की बिजली नहीं काटने की मांग भी की गई है।
शरद पवार ने किसानों से कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया है कि सरकार सीधे किसानों से उनकी समस्याओं की जानकारी ले। उन्होंने भरोसा दिया कि वह खुद अलग-अलग सूखाग्रस्त इलाकों में जाकर किसानों से मिलेंगे और उनकी परेशानियों को समझेंगे। पवार के मुताबिक, वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर राहत के उपायों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने किसानों से अपनी समस्याएं और मांगें खुलकर रखने को कहा।
पवार के दौरे में पुणे जिले के बारामती, पुरंदर और दौंड समेत अन्य सूखाग्रस्त इलाके शामिल हैं। राज्य सरकार की ओर से 265 तहसीलों में सूखा घोषित किए जाने के बाद विपक्षी नेताओं और किसान संगठनों ने दूसरे प्रभावित इलाकों को भी इस दायरे में लाने की मांग उठाई है।
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