
नई दिल्ली। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ऐसे समय वायुसेना की कमान संभालने जा रहे हैं, जब एक तरफ उनके समक्ष लड़ाकू विमानों की घटती स्क्वॉड्रन संख्या बढ़ाने की चुनौती है, वहीं आधुनिक युद्ध के लिए पूरी रणनीति नए सिरे से गढ़ने का जिम्मा भी है। दीक्षित की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब वायुसेना के सामने चीन और पाकिस्तान दोनों मोर्चों पर अपनी क्षमता मजबूत करने की साझा चुनौती है। वायुसेना को तेजी से लड़ाकू विमानों की घटती संख्या, स्वदेशी परियोजनाओं की समय पर आपूर्ति, पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट, ड्रोन, एआई, अंतरिक्ष और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता जैसे मोर्चों पर एकसाथ आगे बढ़ना होगा।
इस लिहाज से एयर मार्शल दीक्षित की पृष्ठभूमि बेहद खास है। वह एक अनुभवी टेस्ट पायलट और उड़ान प्रशिक्षक रहे हैं, जिनके पास 3,500 से अधिक घंटों का उड़ान अनुभव है। मिराज-2000, मिग, जगुआर और तेजस जैसे विमानों को उड़ाने के साथ-साथ वह विमानों के परीक्षण, अपग्रेडेशन और बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान से जुड़े कार्य से सीधे जुड़े रहे हैं। यही तकनीकी और व्यावहारिक अनुभव उनके कार्यकाल को खास बना सकता है।
वायुसेना के सामने सबसे तात्कालिक संकट लड़ाकू स्क्वाड्रनों की घटती संख्या है। सरहदों की रक्षा के लिए वायुसेना को लड़ाकू विमानों की 42 स्क्वाड्रनों की दरकार है, जबकि मौजूदा संख्या घटकर करीब 29 रह गई है। अगले कुछ वर्षों में पुराने पड़ रहे जगुआर, मिग-29 और मिराज विमानों के रिटायर होने से यह दबाव और बढ़ेगा।तेजस मार्क-1ए के 97 अतिरिक्त विमानों की खरीद इस दिशा में बड़ा कदम है। लेकिन केवल ऑर्डर देना काफी नहीं है, असल चुनौती हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने की है। इसके साथ ही पांचवीं पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमान एमका को तेजी से आगे बढ़ाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
किसी भी लड़ाकू विमान का मूल्यांकन केवल उसकी गति या मारक क्षमता से नहीं होता। उसका रडार, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट, स्टेल्थ क्षमताएं और डेटा-लिंक सिस्टम भी आधुनिक युद्ध का परिणाम तय करते हैं। एक टेस्ट पायलट के रूप में दीक्षित की विशेषज्ञता यहां काम आएगी। उनके सामने लक्ष्य एक ऐसा मजबूत एयरोस्पेस पारितंत्र तैयार करने का होगा जो डिजाइन, इंजन तकनीक, रडार और एवियोनिक्स में विदेशी निर्भरता को लगातार कम कर सके। तेजस मार्क-1ए इस दिशा में मौजूदा कदम है, तो एमका इसका भविष्य।
भविष्य के युद्ध में जीत के लिए ड्रोन, उपग्रह, हवाई चेतावनी प्रणाली (अवाक्स), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और एआई-आधारित प्रणालियां एक साझा नेटवर्क में मिलकर काम करेंगी। आने वाले दशक में हवाई श्रेष्ठता का फैसला इस बात से होगा कि कौन-सी वायुसेना अपने विमानों, सेंसरों, ड्रोन और उपग्रहों को कितनी तेजी से एक एकीकृत युद्ध नेटवर्क में बदल सकती है। चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ रह चुके एयर मार्शल दीक्षित का अनुभव यहां भी काम आएगा। प्रस्तावित थिएटर कमांड्स के गठन के दौरान वायुसेना की स्वायत्तता और उसकी आक्रामक क्षमता को बनाए रखते हुए सेना और नौसेना के साथ एकीकरण उनकी बड़ी रणनीतिक परीक्षा होगी। क्योंकि इस प्रक्रिया में वायुसेना की अपनी शिकायतें सामने आती रही हैं। एयर मार्शल दीक्षित के सामने असली चुनौती वायुसेना को पूरी तरह से नेटवर्क-आधारित, स्वदेशी और भविष्य के युद्धों के लिए तैयार एयरोस्पेस पावर में बदलने की होगी।
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