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भुवनेश्वर कुमार पर फिर भरोसा, क्या टीम इंडिया के पास तेज गेंदबाजों की कमी, बुमराह के बाद कौन बनेगा अगला सहारा

October 10, 2026
नई दिल्ली । करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद भुवनेश्वर कुमार (Bhuvneshwar Kumar)की भारतीय टीम में वापसी ने (The world of cricket)क्रिकेट जगत में नई बहस छेड़ दी है। 36 साल की उम्र में टीम इंडिया (Team India)के पेस अटैक में दोबारा जगह बनाने वाले भुवनेश्वर के लिए यह वापसी उनके अनुभव और शानदार प्रदर्शन का इनाम मानी जा रही है। लेकिन इसके साथ ही भारतीय तेज गेंदबाजी की गहराई को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए चुने गए भुवनेश्वर की वापसी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर जसप्रीत बुमराह के बाद भारतीय तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी उठाने के लिए भरोसेमंद विकल्प कौन है।
भुवनेश्वर कुमार ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही खेला था। अब उसी टीम के विरुद्ध उनकी वापसी की कहानी दिलचस्प संयोग लेकर आई है। भुवनेश्वर ने अपने करियर में 21 टेस्ट 87 टी20 अंतरराष्ट्रीय और 121 वनडे मुकाबले खेले हैं। उनकी सबसे बड़ी ताकत नई गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। इसके अलावा वह सटीक यॉर्कर और नियंत्रित लाइन लेंथ से बल्लेबाजों को परेशान करने में माहिर हैं। पिछले दो आईपीएल सीजन में उनके प्रदर्शन ने भी चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा है। करीब आठ की इकॉनमी से 45 विकेट लेने वाले भुवनेश्वर ने साबित किया है कि अनुभव और कौशल के दम पर वह अब भी प्रभावी गेंदबाज बने हुए हैं।
भुवनेश्वर की वापसी को समझने के लिए भारतीय क्रिकेट के पुराने उदाहरणों पर भी नजर डालना जरूरी है। पूर्व तेज गेंदबाज आशीष नेहरा ने भी 2011 विश्व कप के बाद करीब पांच साल तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर रहने के बाद 2016 में टीम इंडिया में वापसी की थी। उस समय उनकी उम्र भी लगभग 36 साल थी। नेहरा ने इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी उपयोगिता साबित की और 2017 में संन्यास लिया। ऐसे में भुवनेश्वर की वापसी को उम्र के लिहाज से असामान्य नहीं कहा जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या यह वापसी केवल उनके मौजूदा प्रदर्शन का परिणाम है या भारतीय टीम को अनुभवी तेज गेंदबाजों की कमी भी महसूस हो रही है।
जसप्रीत बुमराह भारतीय गेंदबाजी की सबसे मजबूत कड़ी हैं लेकिन उनकी गैरमौजूदगी में टीम को संतुलित रखने की चुनौती बनी रहती है। मोहम्मद शमी लंबे समय तक इस भूमिका को मजबूती से निभाते रहे हैं लेकिन उन्हें लगातार मौके मिलने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। मोहम्मद सिराज ने भी कई मुकाबलों में अपनी क्षमता दिखाई है लेकिन सीमित ओवरों के क्रिकेट में उनकी भूमिका और निरंतरता को लेकर चर्चा जारी है। दूसरी ओर अर्शदीप सिंह प्रसिद्ध कृष्णा हर्षित राणा और मयंक यादव जैसे गेंदबाजों ने अलग-अलग मौकों पर उम्मीद जगाई है। इसके बावजूद किसी एक तेज गेंदबाज को तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक भरोसेमंद विकल्प मानना अभी आसान नहीं है।
भारतीय क्रिकेट के पास बड़ा घरेलू ढांचा आईपीएल जैसा प्रतिस्पर्धी मंच और खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं। बल्लेबाजी में हर दौर के बाद नई पीढ़ी सामने आती रही है। सचिन तेंदुलकर सौरव गांगुली और वीरेंद्र सहवाग के बाद विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे खिलाड़ी आए। अब युवा बल्लेबाज भी अपनी जगह बनाने लगे हैं। तेज गेंदबाजी में हालांकि ऐसी निरंतरता उतनी स्पष्ट दिखाई नहीं देती। चोटें कार्यभार प्रबंधन और प्रदर्शन में उतार चढ़ाव तेज गेंदबाजों के करियर को प्रभावित करते रहे हैं।
भुवनेश्वर कुमार की वापसी इसलिए केवल एक खिलाड़ी की वापसी नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट व्यवस्था के सामने एक बड़ा सवाल भी है। बुमराह जैसा गेंदबाज हर पीढ़ी में नहीं मिलता और किसी दूसरे खिलाड़ी से हूबहू उनकी जगह लेने की उम्मीद करना भी सही नहीं होगा। लेकिन टीम के पास ऐसे विकल्प जरूर होने चाहिए जो उनकी अनुपस्थिति में गेंदबाजी को मजबूती दे सकें। न्यूजीलैंड सीरीज भुवनेश्वर के लिए खुद को दोबारा साबित करने का मौका होगी। साथ ही यह चयनकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण परीक्षा होगी कि वे अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा तेज गेंदबाजों को किस तरह तैयार करते हैं। आखिरकार सबसे बड़ा सवाल यही है कि भुवी के बाद कौन और भविष्य में बुमराह की गैरमौजूदगी में टीम इंडिया की अगुवाई कौन करेगा।

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