इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की रिहाई की मांग को लेकर जारी राजनीतिक तनाव के बीच खैबर पख्तूनख्वा प्रांत (Pakhtunkhwa province) में आपातकाल लागू कर दिया गया है। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने रविवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार की सलाह पर यह कदम उठाया। इसके साथ ही जेल में बंद इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेतृत्व वाली प्रांतीय सरकार को निलंबित किए जाने की खबर है। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रांत में सेना तैनात करने का आदेश दिया गया है। वहीं, पीटीआई के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक, प्रांत के पूर्व मुख्यमंत्री अली अमीन गंडापुर को उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पीटीआई इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रही है और राजधानी इस्लामाबाद की ओर मार्च निकालने की चेतावनी दे चुकी है।
पीटीआई के प्रवक्ता जुल्फिकार बुखारी ने सरकार के कदम की आलोचना करते हुए इसे आपातकाल की आड़ में तख्तापलट जैसा कदम बताया। उन्होंने आशंका जताई कि इससे पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा बढ़ सकती है।
इस्लामाबाद की ओर प्रस्तावित मार्च से पहले पाकिस्तानी अधिकारियों ने इमरान खान की तीन बहनों और पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। उनके करीबी सहयोगी के अनुसार, पीटीआई के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
प्रदर्शनकारियों को संसद तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रमुख राजमार्गों पर शिपिंग कंटेनर लगाए गए हैं। गृह मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
सरकार की इन कार्रवाइयों से पीटीआई और केंद्र के बीच टकराव और बढ़ने की आशंका है। पार्टी इमरान खान की रिहाई के साथ अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई का भी विरोध कर रही है।
पाकिस्तान की केंद्र सरकार और सेना का आरोप है कि खैबर पख्तूनख्वा की पीटीआई सरकार प्रांत में आतंकवाद पर काबू पाने में नाकाम रही है। दूसरी ओर, पीटीआई ने इन आरोपों को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि केंद्र सरकार प्रांत को पर्याप्त धन उपलब्ध नहीं करा रही और सुरक्षा संबंधी समस्याओं के लिए राज्य सरकार को जिम्मेदार ठहराना राजनीतिक कदम है।
पीटीआई ने यह भी आरोप लगाया है कि इस्लामाबाद प्रांत के लोगों के निर्वाचित जनादेश को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को दरकिनार करके सुरक्षा व्यवस्था बहाल नहीं की जा सकती।
पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने अफगानिस्तान की सीमा से लगे खैबर पख्तूनख्वा में सेना की तैनाती का आदेश दिया है। यह क्षेत्र लंबे समय से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की गतिविधियों और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के साथ संघर्ष के कारण संवेदनशील बना हुआ है।
केंद्र सरकार का तर्क है कि प्रांत में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए कठोर कदम जरूरी हैं। हालांकि, पीटीआई नेताओं का आरोप है कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को उनकी राजनीतिक स्थिति कमजोर करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
जुल्फिकार बुखारी ने आपातकाल लागू करने के फैसले को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए इसकी आलोचना की है। ऐसे में खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल, सेना की तैनाती और पीटीआई नेताओं की हिरासत के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक संकट और गहराता दिखाई दे रहा है।
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