ब्रसेल्स। रूस और यूक्रेन (Russia and Ukraine) के बीच जारी युद्ध के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने मॉस्को के खिलाफ प्रतिबंधों का दायरा और बढ़ा दिया है। यूरोपीय संघ (European Union) ने रूस के सैन्य-औद्योगिक ढांचे, हथियार निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े करीब 1600 लोगों और कंपनियों को प्रतिबंधों के दायरे में शामिल किया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल आयात करने को लेकर समझौते की घोषणा की थी। यूक्रेन ने भी अमेरिका के इस कदम पर नाराजगी जताई है।
यूरोपीय संघ के नए प्रतिबंध मुख्य रूप से रूस के हथियार उद्योग, सैन्य उत्पादन और उससे जुड़ी आपूर्ति श्रृंखला को निशाना बनाते हैं। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास के अनुसार, प्रतिबंधों की सूची में शामिल आधे से अधिक नाम रूस की बैलिस्टिक मिसाइल आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े हैं।
इसके अलावा, यूक्रेन के रूसी कब्जे वाले क्षेत्रों में कथित फर्जी चुनाव कराने या उनमें भाग लेने के आरोप में 77 लोगों को भी प्रतिबंधित किया गया है। इन प्रतिबंधों के तहत संबंधित लोगों और संस्थाओं की संपत्तियां फ्रीज की जाएंगी। इस कार्रवाई के बाद रूस के खिलाफ यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों की कुल संख्या 4,500 से अधिक हो गई है।
अमेरिका में ईंधन की कीमतों को लेकर बढ़ते दबाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से डीजल आयात करने के समझौते की घोषणा की है। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने दावा किया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अमेरिकी और वैश्विक बाजारों के लिए बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध कराने पर सहमत हुए हैं।
हालांकि, पुतिन ने बाद में कहा कि रूस अमेरिका और वैश्विक बाजारों को तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने के लिए तैयार है। उन्होंने अपने बयान में आपूर्ति की किसी निश्चित मात्रा का उल्लेख नहीं किया।
विश्लेषकों ने इस प्रस्ताव की व्यावहारिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि रूस इतनी बड़ी मात्रा में डीजल उपलब्ध करा पाएगा या नहीं और इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की संभावित आपूर्ति को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने नाराजगी जताई है। उन्होंने अमेरिकी कदम को पुतिन के लिए एक तोहफे के रूप में देखा।
यूक्रेन की चिंता यह है कि रूस को तेल कारोबार से मिलने वाली अतिरिक्त आय उसके युद्ध प्रयासों को आर्थिक मदद दे सकती है। दूसरी ओर, अमेरिका में ईंधन की कीमतों को कम करने की जरूरत इस समझौते के पीछे प्रमुख कारण बताई जा रही है।
इस घटनाक्रम ने रूस के प्रति अमेरिका और यूरोपीय संघ के रुख में अंतर को फिर चर्चा में ला दिया है। जहां यूरोपीय संघ रूस के सैन्य ढांचे पर आर्थिक दबाव बढ़ाने में जुटा है, वहीं ट्रंप प्रशासन की ओर से रूस से ऊर्जा आपूर्ति की घोषणा सामने आई है।
इस बीच यूक्रेन ने सोमवार को आरोप लगाया कि रूस उसके ऊर्जा प्रतिष्ठानों को लगातार निशाना बना रहा है। यह दावा ट्रंप के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से संघर्षविराम होने की बात कही थी।
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, खार्किव के बाहरी इलाके में स्थित एक ऊर्जा प्रतिष्ठान पर हमला किया गया। सरकारी ऊर्जा कंपनी नाफ्टोगैस के कई उपकरणों को नुकसान पहुंचने की जानकारी भी दी गई।
इसके अलावा, यूक्रेन ने दावा किया कि रूस के एक अन्य हमले में तीन नागरिकों की मौत हुई है।
रूस पर यूरोपीय संघ के नए प्रतिबंध, अमेरिका की ओर से घोषित डीजल आपूर्ति समझौता और यूक्रेन के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव को फिर बढ़ा दिया है।
यूरोपीय संघ की कार्रवाई का उद्देश्य रूस के सैन्य उत्पादन और हथियार आपूर्ति नेटवर्क पर दबाव बढ़ाना है। वहीं, अमेरिकी प्रस्ताव के तहत ऊर्जा आपूर्ति और घरेलू ईंधन कीमतों को लेकर अलग रणनीति सामने आई है। हालांकि, डीजल आपूर्ति की घोषित मात्रा, समझौते की वास्तविक स्थिति और ऊर्जा क्षेत्र में संघर्षविराम को लेकर संबंधित पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
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