ढाका। बांग्लादेश में दुर्गा पूजा (Durga Puja) से पहले प्रधानमंत्री तारिक रहमान (Tariq Rahman) ने हिंदू समुदाय को सुरक्षा और समान अधिकारों का भरोसा दिलाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सरकार की जिम्मेदारी हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो। धर्म के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए और प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार मिलने चाहिए।
बांग्लादेश की समाचार एजेंसी बीएसएस (BSS) के मुताबिक, प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने ढाका-17 चुनाव क्षेत्र के हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों से अपने कार्यालय में मुलाकात के दौरान यह बात कही। ढाका-17 में गुलशन, डिप्लोमैटिक जोन, बनानी, बारीधारा और ढाका कैंटोनमेंट जैसे महत्वपूर्ण इलाके शामिल हैं। प्रधानमंत्री स्वयं इसी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि बांग्लादेश के नागरिक के रूप में प्रत्येक व्यक्ति के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। किसी भी नागरिक के साथ उसके धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है और वह सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।
प्रधानमंत्री ने हिंदू समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान बांग्लादेश के इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश के मुक्ति संग्राम में सभी धर्मों के लोगों ने मिलकर संघर्ष किया था। इसी तरह 1990 के बड़े जन आंदोलन और 2024 के आंदोलन में भी विभिन्न धर्मों के लोगों ने एक साथ भाग लिया था।
उन्होंने कहा कि जब देश की आजादी और लोकतंत्र की स्थापना जैसे महत्वपूर्ण संघर्षों में लोगों ने अपनी धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर एकजुटता दिखाई, तो दूसरे मामलों में धर्म के आधार पर भेदभाव क्यों होना चाहिए? सभी समुदायों ने मिलकर देश की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए संघर्ष किया है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा मिलनी चाहिए।
इससे पहले पिछले महीने बांग्लादेश सरकार ने दुर्गा पूजा के आयोजन के लिए सरकारी सहायता बढ़ाकर 5 करोड़ टका कर दी थी। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए पांच दिन की छुट्टी का प्रावधान भी किया गया था।
सरकार के इन फैसलों को देश के हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय तक पहुंच बनाने और उनके धार्मिक आयोजन को समर्थन देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दुर्गा पूजा से पहले प्रधानमंत्री का सुरक्षा और समान अधिकारों को लेकर दिया गया यह भरोसा भी इसी संदर्भ में अहम माना जा रहा है।
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