नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन (Russia – Ukraine) के बीच जारी युद्ध में ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच हुए कथित एनर्जी सीजफायर पर अब संकट के बादल मंडरा रहे हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि अमेरिकी अनुरोध पर रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले सीमित करने के बावजूद रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना जारी रखा। ऐसे में यूक्रेन अब एकतरफा संयम बरतने के लिए तैयार नहीं है। इस घटनाक्रम से रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का खतरा फिर बढ़ गया है।
जेलेंस्की ने अमेरिकी मध्यस्थता से हुए इस समझौते की आलोचना करते हुए इसे कमजोर व्यवस्था बताया। उनका कहना है कि युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर दबाव बढ़ाना जरूरी है। वहीं, रूस ने यूक्रेन पर अपनी रियाजान तेल रिफाइनरी को निशाना बनाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दोनों पक्षों के दावों के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा और युद्ध को और व्यापक होने से रोकने की कोशिशों पर सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिकी अनुरोध पर तीन दिन तक हमले सीमित रखने का दावा
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका के अनुरोध पर यूक्रेन ने तीन दिन तक रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले सीमित रखे। इसके बावजूद रूस की ओर से यूक्रेन के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आती रहीं।
जेलेंस्की के मुताबिक, ऐसी स्थिति में यूक्रेन से एकतरफा संयम जारी रखने की अपेक्षा नहीं की जा सकती। उन्होंने संकेत दिया कि रूस के ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने के विकल्प पर फिर विचार किया जा सकता है।
रियाजान रिफाइनरी पर हमले की कोशिश का रूस का आरोप
रूस के रक्षा मंत्रालय ने यूक्रेन पर मॉस्को के दक्षिण-पूर्व में स्थित रियाजान तेल रिफाइनरी पर बड़ा हमला करने की कोशिश का आरोप लगाया है। रूसी पक्ष के अनुसार, इस दौरान चार मिसाइलों और दर्जनों ड्रोन को रोकने का दावा किया गया। मंत्रालय ने बताया कि मलबा गिरने से रिफाइनरी परिसर में आग लग गई।
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के दौरान तेल रिफाइनरियां, ईंधन भंडार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े दूसरे ठिकाने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लक्ष्य बन गए हैं। ऐसे प्रतिष्ठानों पर हमलों से ईंधन उत्पादन, सैन्य रसद और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, रियाजान में हुए घटनाक्रम और नुकसान से जुड़ी जानकारी के लिए दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
‘युद्ध खत्म करने के लिए रूस पर बढ़ाना होगा दबाव’
जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर भी युद्ध समाप्त करने के लिए रूस पर दबाव बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यूरोप के सभी देश चाहते हैं कि युद्ध जल्द खत्म हो, लेकिन इसके लिए ठोस और मजबूत कदम उठाने होंगे। उनके मुताबिक, यूक्रेन को अतिरिक्त रक्षा हथियारों की जरूरत है और लोगों की जान बचाने के लिए सहयोग बढ़ाना जरूरी है।
इससे पहले पत्रकार पियर्स मॉर्गन के साथ बातचीत में जेलेंस्की ने ट्रंप और पुतिन के बीच ऊर्जा से जुड़े समझौते को लेकर भी नाराजगी जताई थी। उन्होंने दावा किया कि रूस से डीजल खरीदने को लेकर अमेरिका की पहल और ऊर्जा संघर्ष पर बनी व्यवस्था से यूक्रेन के हितों को नुकसान पहुंचा है।
यूक्रेन की चिंता यह है कि यदि रूस को ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने के लिए प्रभावी ढंग से बाध्य नहीं किया गया, तो युद्ध में उसकी ऊर्जा आपूर्ति और बुनियादी ढांचे को लगातार नुकसान पहुंच सकता है।
स्टारलिंक और स्टारशील्ड सेवाओं को लेकर भी विवाद
इस पूरे घटनाक्रम में उपग्रह संचार सेवाओं का मुद्दा भी सामने आया है। अमेरिकी मीडिया संस्थान एक्सियोस की रिपोर्ट में एक यूक्रेनी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि यूक्रेन ने रात के दौरान रूस की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया।
रिपोर्ट में स्टारलिंक और अमेरिकी सरकार से जुड़ी स्टारशील्ड सेवाओं की बहाली का भी उल्लेख किया गया है। यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, स्टारलिंक पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा लागू रहने से कुछ सैन्य अभियानों में कठिनाइयां आ सकती हैं।
यूक्रेनी अधिकारियों का दावा है कि तकनीकी प्रतिबंधों से टोही और अवरोधक ड्रोन के संचालन, लंबी दूरी के हमलों और खुफिया जानकारी जुटाने की क्षमता प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन को रूसी बैलिस्टिक मिसाइल हमले की पूर्व चेतावनी नहीं मिली।
अमेरिकी अधिकारियों ने संबंधित व्यवधान को तकनीकी खराबी बताया, जबकि कुछ यूक्रेनी अधिकारियों ने आशंका जताई कि इसका संबंध वाशिंगटन के दबाव से हो सकता है। इन दावों के बीच तकनीकी समस्याओं और राजनीतिक फैसलों के बीच वास्तविक संबंध स्पष्ट होना अभी बाकी है।
ट्रंप की मध्यस्थता पर क्यों उठ रहे सवाल?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने से जुड़े समझौते की घोषणा की थी। इसका उद्देश्य ऊर्जा बुनियादी ढांचे को युद्ध का निशाना बनने से रोकना और तनाव कम करने की दिशा में कदम बढ़ाना था।
हालांकि, जेलेंस्की ने बाद में कहा कि उन्हें इस समझौते की पूरी जानकारी नहीं थी। इससे अमेरिकी मध्यस्थता और यूक्रेन की सहमति को लेकर सवाल खड़े हुए। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने ट्रंप के साथ संबंधों में तनाव का भी उल्लेख किया और कहा कि रिश्ते सुधारने की जिम्मेदारी केवल यूक्रेन की नहीं है।
उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रति ट्रंप के कथित झुकाव की भी आलोचना की। इस तरह ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की पहल केवल सैन्य मुद्दा नहीं रही, बल्कि अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच कूटनीतिक मतभेदों का हिस्सा भी बन गई है।
आगे क्या होगा?
रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले रोकने की व्यवस्था का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि दोनों पक्ष वास्तव में हमले रोकने के लिए तैयार हैं या नहीं और किसी समझौते की निगरानी कैसे की जाती है। यदि एक पक्ष संयम बरतने का दावा करे और दूसरा हमले जारी रखने का आरोप लगाए, तो ऐसी व्यवस्था लंबे समय तक टिकना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल जेलेंस्की के बयानों से संकेत मिलता है कि यूक्रेन रूसी ऊर्जा ठिकानों पर हमले सीमित रखने की अपनी नीति पर पुनर्विचार कर रहा है। दूसरी ओर, रूस ने भी यूक्रेन पर अपनी रिफाइनरी को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
कुल मिलाकर, ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकने की पहल अब गंभीर चुनौती का सामना कर रही है। हालांकि, इसे औपचारिक रूप से पूरी तरह समाप्त हो चुका समझौता मानने से पहले यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दोनों देशों के बीच इसकी शर्तें क्या थीं और क्या किसी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर इससे हटने की घोषणा की है।
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