
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया है. दिपके कनॉट प्लेस जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि नेहा बोरा सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंडी हाउस में प्रदर्शन कर रही थीं.
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया गया है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वह कनॉट प्लेस जाने की कोशिश कर रहे थे. दिपके के अलावा आइसा प्रमुख नेहा बोरा को भी दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में जाने के दौरान मंडी हाउस में हिरासत में ले लिया है. वह सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंडी हाउस में प्रदर्शन कर रही थीं. उनके अलावा आइसा के कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में लिए गए हैं.
दिल्ली पुलिस ने पहले अभिजीत दिपके से तिरंगा मार्च नहीं निकालने की गुजारिश की थी. इसके लिए पुलिस आज दिपके के दिल्ली स्थित उनके आवास पर भी पहुंची थी और बिना अनुमति के मार्च नहीं निकालने को लेकर नोटिस दिया था.
दिल्ली पुलिस की टीम दिपके के झंडेवालान वाले घर पर पहुंची थी. यह घर दिपके के दोस्त का है. पुलिस से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च नहीं निकालने को लेकर नोटिस देने के लिए 15 से 20 पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे. उनका कहना है कि सेंट्रल पार्क के आसपास BNSS की धारा 163 लगी हुई है.
अभिजीत दिपके के बाद नेहा बोरा को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, कनॉट प्लेस में बढ़ी सुरक्षा
दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके और नेहा बोरा को हिरासत में ले लिया है. दिपके कनॉट प्लेस जाने की कोशिश कर रहे थे, जबकि नेहा बोरा सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंडी हाउस में प्रदर्शन कर रही थीं.
अभिजीत दिपके के बाद नेहा बोरा को भी दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, कनॉट प्लेस में बढ़ी सुरक्षा
दिल्ली पुलिस ने तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया
पहले बिना अनुमति के मार्च नहीं निकालने को लेकर दिया था नोटिस
नोटिस देने के लिए अभिजीत दिपके के घर पहुंचे थे 15 से 20 पुलिसकर्मी
सीजेपी के अभिजीत दिपके को क्यों हिरासत में लिया गया? पढ़ें नीचे
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित तिरंगा मार्च से पहले अभिजीत दिपके को हिरासत में ले लिया गया है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वह कनॉट प्लेस जाने की कोशिश कर रहे थे. दिपके के अलावा आइसा प्रमुख नेहा बोरा को भी दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ प्रदर्शन में जाने के दौरान मंडी हाउस में हिरासत में ले लिया है. वह सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मंडी हाउस में प्रदर्शन कर रही थीं. उनके अलावा आइसा के कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में लिए गए हैं.
दिल्ली पुलिस ने पहले अभिजीत दिपके से तिरंगा मार्च नहीं निकालने की गुजारिश की थी. इसके लिए पुलिस आज दिपके के दिल्ली स्थित उनके आवास पर भी पहुंची थी और बिना अनुमति के मार्च नहीं निकालने को लेकर नोटिस दिया था.
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दिल्ली पुलिस की टीम दिपके के झंडेवालान वाले घर पर पहुंची थी. यह घर दिपके के दोस्त का है. पुलिस से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च नहीं निकालने को लेकर नोटिस देने के लिए 15 से 20 पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे. उनका कहना है कि सेंट्रल पार्क के आसपास BNSS की धारा 163 लगी हुई है.
वहीं, सीजेपी के इस तिरंगा मार्च को लेकर कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क के पास सुरक्षा कड़ी कर दी गई है. साथ ही दिल्ली पुलिस लोगों से गुजारिश कर रही है कि लोग सेंट्रल पार्क न जाएं, क्योंकि वहां पर धारा 163 लगी हुई है.
हालांकि इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लिए सेंट्रल पार्क की तरफ जा रहे हैं. इनर सर्कल में लोगों की भीड़ और बड़ी संख्या में पैरामिलिट्री फोर्सेस नजर आ रही है. लोग नारेबाजी कर रहे हैं और भीड़ में शामिल होकर इनर सर्कल से होते हुए सेंट्रल पार्क की तरफ जा रहे हैं.
आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि बीजेपी को तिरंगे से नफरत है. उन्होंने कहा कि RSS ने अपने दफ्तर पर तिरंगा नहीं फहराया. अब देशवासियों को तिरंगा फहराने से रोक रहे हैं. अभिजीत दीपके और नेहा बोरा को भी हिरासत में ले लिया. उन्होंने यह भी कहा कि धरना प्रदर्शन की वजह से व्यापारियों को नुकसान हो रहा है.
CJP के सदस्यों आशुतोष रांका और सौरव दास को तिरंगा फहराने की वजह से जेल में डालने का आरोप लगाते हुए दिपके ने आज शुक्रवार शाम को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में लहरा दो तिरंगा मार्च निकालने का ऐलान किया है. उनके मार्च को देखते हुए नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) ने पार्क को शुक्रवार और शनिवार 2 दिन के लिए आम लोगों को बंद कर दिया है. साथ ही वहां पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
दूसरी ओर, ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च को देखते हुए, नई दिल्ली इलाके में 6 हजार से से अधिक दिल्ली पुलिस के जवान, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) की 220 कंपनियां और CCTV कैमरे लगाए गए हैं. कनॉट प्लेस और राजीव चौक के साथ-साथ सेंट्रल पार्क, जंतर-मंतर, पालिका बाजार, आस-पास के मेट्रो स्टेशन और लुटियंस दिल्ली के अन्य संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं.
शाम 5 बजे होने वाले तिरंगा मार्च के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े, इसके लिए अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है. दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस, पटेल चौक, ITO और संसद मार्ग सहित कई जगहों पर बैरिकेड्स भी लगाए हैं. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए अन्य जिलों से 5 हजार से अतिरिक्त जवानों को रिजर्व में रखा गया है.
नई दिल्ली के लिए CAPF की 220 कंपनियां तैनात की गई हैं, जो आस-पास के जिलों, सीमावर्ती इलाकों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर भी नजर रखेंगी. CAPF की एक कंपनी में लगभग 100 जवान होते हैं. दिन भर में 3 शिफ्ट होंगी, और हर शिफ्ट में CAPF की 30 कंपनियों को तैनात किया जाएगा. रात में अगर भीड़ बढ़ी तो और सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे.
सौरव दास और अभिषेक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर शुक्रवार को CJP के प्रस्तावित तिरंगा मार्च के मद्देनजर नई दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) ने 16 और 17 अक्टूबर को कनॉट प्लेस का सेंट्रल पार्क आम लोगों के लिए बंद रखने का ऐलान किया है. यह बंद सेंट्रल दिल्ली में लहरा दो तिरंगा प्रदर्शन के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हुआ है.
इस बीच NDMC की ओर से सेंट्रल पार्क को बंद किए जाने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई और इस मसले पर जल्द सुनवाई की मांग भी की गई, हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से मना कर दिया. साथ ही कोर्ट ने उम्मीद जताई कि सभी संबंधित पक्षों में “समझदारी से काम लिया जाएगा”.
मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने आज शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया और कहा, “हमें उम्मीद है कि सभी लोग समझदारी से काम लेंगे. इन दिनों छोटे दुकानदार अपनी आजीविका कमाते हैं. हम इसे अच्छी तरह से समझते हैं कि इससे पूरे परिवारों को कितनी कठिनाई और परेशानी का सामना करना पड़ेगा.”
जस्टिस बागची ने कहा कि विरोध प्रदर्शन से जुड़े कई मुद्दे- जैसे विरोध करने का अधिकार, ‘मूंगफली’ बेचने का प्रस्ताव और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं- आपस में किस तरह से जुड़े हुए हैं. जस्टिस बागची ने कहा, “कोई विरोध करना चाहता है, तो कोई ‘मूंगफली’ बेचना चाहता है, और कोई कानून-व्यवस्था बनाए रखना चाहता है. ये सभी चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं.” उन्होंने आगे कहा कि अगर इस वजह से व्यापार में नुकसान होता है, तो कोर्ट अपने संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकता है.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान, वकील ने बताया कि NDMC ने कल गुरुवार देर रात सेंट्रल पार्क को बंद करने का निर्देश जारी किया, जिससे वहां पर व्यापार करना असंभव हो गया है. इस पर जस्टिस ने संकेत दिया कि अगर उठाए गए कदम जरूरत से ज्यादा सख्त पाए जाते हैं, तो कोर्ट के पास हस्तक्षेप करने का पूरा अधिकार है. बेंच ने यह भी संकेत दिया कि इस याचिका को 26 या 27 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है.
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