
नई दिल्ली। फ्लाईदुबई (flydubai) के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार (Indian pilot Captain Smit Machhar) ने उस खौफनाक घटना का अनुभव साझा किया है, जिसमें उड़ान के दौरान कॉकपिट (Cockpit) के भीतर उन पर हमला किया गया था। सिर पर लगातार वार होने से उनकी हालत बिगड़ गई थी और वह बार-बार होश खो रहे थे। इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभालने और विमान में सवार लोगों की सुरक्षा के लिए प्रयास जारी रखे।
स्काई न्यूज अरबिया को दिए इंटरव्यू में मछार ने कहा कि उस समय उनके मन में एक ही बात थी कि वह इस तरह अपनी जान नहीं गंवा सकते। उन्होंने कहा, “मुझे एहसास हुआ कि मुझे कुछ करना होगा। मैं ऐसे नहीं मर सकता। मैं अपनी मौत स्वीकार नहीं कर सकता।” उन्होंने उस मुश्किल घड़ी को चमत्कार बताते हुए कहा कि विमान में मौजूद लोगों के भीतर जीवित बचने की प्रबल इच्छाशक्ति थी।
नमाज के लिए ध्यान हटाया, तभी सिर पर हुआ हमला
कैप्टन मछार के मुताबिक, दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 शुरुआत में सामान्य रूप से चल रही थी। उड़ान के करीब दो घंटे बाद को-पायलट हमाम अल हमामी ने नमाज पढ़ने की इच्छा जताई। मछार ने सम्मान जताते हुए अपना ध्यान दूसरी ओर कर लिया। इसी दौरान उनके सिर के पिछले हिस्से पर जोरदार वार किया गया।
उन्होंने बताया कि पहले उन्हें लगा कि विमान की छत का कोई हिस्सा टूटकर उनके सिर पर गिरा है। लेकिन कुछ ही सेकंड में उन्हें समझ आ गया कि उन पर हमला हो रहा है। वार इतने तेज थे कि उनकी नजर धुंधली पड़ गई और सामने की चीजें साफ दिखाई देना बंद हो गईं।
बार-बार बेहोश हुए, फिर भी दरवाजा खोलने की कोशिश की
मछार ने बताया कि हमले के बाद वह बार-बार बेहोश हो रहे थे। उन्होंने सीट बेल्ट खोली और खुद को अगले हमलों से बचाने की कोशिश की। इस दौरान उनके हाथ में भी चोट आई। उन्होंने दूसरे कैप्टन को कॉकपिट में बुलाने और दरवाजा खोलने के लिए स्विच तक पहुंचने का प्रयास किया।
उनके मुताबिक, एक बार वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे, लेकिन हमलावर की धमकी के बाद दरवाजा फिर बंद हो गया। इसी बीच उन्हें विमान के इंजन की आवाज में बदलाव महसूस हुआ और विमान तेजी से नीचे जाता हुआ लगा।
कैप्टन मछार ने बताया कि वह उपकरणों को ठीक से देख पाने की स्थिति में नहीं थे, लेकिन इंजन की आवाज और विमान की गति में बदलाव से उन्हें गड़बड़ी का एहसास हो रहा था। हमले के दौरान की उनकी यादें भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। उन्हें याद है कि वह दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे और पैरों का सहारा लेकर आगे बढ़ रहे थे। बाद में उन्होंने खुद को कॉकपिट और गैली के बीच पड़ा पाया।
नेतन्याहू से बातचीत में भी बताया था संघर्ष
इससे पहले अस्पताल में इलाज के दौरान मछार ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से बातचीत में भी हमले के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि सिर के पिछले हिस्से पर लगातार वार किए गए और शुरुआती क्षणों में उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है।
नेतन्याहू से बातचीत के दौरान मछार ने अपने भीतर बची आखिरी ताकत का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें लगा कि उनके पास कार्रवाई करने का एक और मौका है। वह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल हुए, जिससे यात्रियों और क्रू के सदस्यों को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करने का अवसर मिला।
यात्रियों और क्रू ने हमलावर को काबू करने में की मदद
मामले के मुताबिक, दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में को-पायलट ने इमरजेंसी क्रैश एक्स से कैप्टन मछार पर हमला किया था। विमान में मौजूद यात्रियों, केबिन क्रू और ड्यूटी पर नहीं रहे कुछ अन्य पायलटों ने हालात संभालने और हमलावर को काबू करने में मदद की। इसके बाद दूसरे पायलटों ने विमान का नियंत्रण संभाला।
विमान को सऊदी अरब के तबूक की ओर मोड़ा गया, जहां उसकी आपातकालीन लैंडिंग कराई गई। विमान में सवार सभी 180 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना में किसी की मौत नहीं हुई। लैंडिंग के बाद को-पायलट को हिरासत में ले लिया गया।
तेल अवीव एयरपोर्ट से विमान टकराने की थी कथित योजना
जांच के दौरान संयुक्त अरब अमीरात के अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि को-पायलट की कथित योजना विमान पर नियंत्रण हासिल कर उसे तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट के यात्री टर्मिनल से टकराने की थी। UAE के अधिकारी इस मामले की जांच विमान को हाईजैक करने की कोशिश के तौर पर कर रहे हैं। जांच जारी है और आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की पड़ताल पर निर्भर करेंगे।
हमले में घायल कैप्टन मछार को पहले सऊदी अरब के तबूक स्थित अस्पताल में उपचार दिया गया। बाद में उन्हें आगे के इलाज के लिए अबू धाबी ले जाया गया। भारतीय दूतावास ने 6 अक्टूबर को बताया था कि उनकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है।
बेटे को किया पहला फोन, मदद करने वालों का जताया आभार
स्काई न्यूज अरबिया से बातचीत में मछार ने इलाज के दौरान मदद करने वाले लोगों के प्रति आभार जताया। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने दो साल के बेटे को फोन किया।
मछार के मुताबिक, हमले की याद कई बार अचानक उनके मन में लौट आती थी। ऐसे क्षणों में उनकी धड़कन तेज हो जाती थी। विमान के सुरक्षित जमीन पर उतरने के बाद ही उन्हें एहसास हुआ कि वह तत्काल खतरे से बाहर हैं।
भारतीय पायलट के साहस और मुश्किल हालात में उनके संघर्ष की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सराहना की है। मछार ने सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मिले उपचार और सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि वह वहां मिले समर्थन को कभी नहीं भूलेंगे।
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