
नई दिल्ली ।दशहरा यानी विजयादशमी (Vijayadashami) की तारीख को लेकर इस साल लोगों के बीच असमंजस बना हुआ है। कुछ जगहों पर यह पर्व 20 अक्टूबर को मनाने की तैयारी है, जबकि पश्चिम बंगाल (West Bengal) में विजयादशमी मनाई जाएगी। इस अंतर की वजह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि (Dashami Tithi) का दो दिनों तक रहना है। ऐसे में पूजा-पाठ, शस्त्र पूजन और रावण दहन (Ravana Dahan) की योजना बनाने से पहले तारीख और शुभ मुहूर्त (Auspicious Timing) की जानकारी लेना जरूरी है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में दशहरा मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। वहीं, पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा की क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार 21 अक्टूबर को विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन वहां मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है और सिंदूर खेला जैसी पारंपरिक रस्में निभाई जाती हैं। इस तरह पर्व की तारीख क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
पंचांग के अनुसार, नई दिल्ली में दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर होगा। तिथि के इस समय के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में पर्व मनाने की परंपरा और धार्मिक कार्यक्रमों के समय में अंतर दिखाई दे सकता है। इसलिए स्थानीय रीति-रिवाजों और पंचांग के अनुसार आयोजन करना उचित माना जाता है।
दशहरे के दिन विजय मुहूर्त को पूजा के लिए विशेष महत्व दिया जाता है। नई दिल्ली में 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। वहीं, अपराह्न पूजा का समय दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक बताया गया है। इन समयों के दौरान लोग अपनी परंपरा के अनुसार भगवान श्रीराम, मां दुर्गा और शस्त्रों की पूजा करते हैं। दूसरे शहरों में मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग से इसकी पुष्टि करना जरूरी है।
दशहरे पर रावण दहन भी प्रमुख आयोजन होता है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में 20 अक्टूबर की शाम रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाएगा। परंपरा के अनुसार, रावण दहन सूर्यास्त के बाद किया जाता है। हालांकि, इसके लिए पूरे देश में एक समान समय निर्धारित नहीं है। अलग-अलग शहरों में रामलीला समितियां और स्थानीय आयोजक अपने कार्यक्रम के अनुसार समय तय करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं में दशहरे को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर माता सीता को उसकी कैद से मुक्त कराया था। इसी विजय की स्मृति में रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है। यह पर्व लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश भी देता है।
विजयादशमी का संबंध मां दुर्गा और महिषासुर के युद्ध से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर उसके अत्याचारों से संसार को मुक्ति दिलाई थी। इसी कारण यह पर्व शक्ति और साहस की विजय के रूप में भी मनाया जाता है।
दशहरे पर शस्त्र पूजन और शमी वृक्ष की पूजा करने की भी परंपरा है। कई स्थानों पर लोग अपने वाहनों, औजारों, मशीनों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं। व्यापारी वर्ग कारोबार से जुड़ी वस्तुओं और बही-खातों का पूजन करता है। इन धार्मिक परंपराओं के माध्यम से लोग सुख, समृद्धि और कार्यों में सफलता की कामना करते हैं। पूजा की विधि और समय स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग हो सकते हैं।
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