लाहौर। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) की तीन बहनों की हिरासत के मामले में लाहौर हाई कोर्ट (Lahore High Court) ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने गुरुवार को पंजाब के गृह सचिव (home Secretary) और कोट लखपत जेल (Lakhpat Jail) के अधीक्षक को तलब करते हुए 28 अक्टूबर को पेश होने और अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया। तीनों बहनों को सितंबर से जेल में रखा गया है। याचिकाकर्ता ने उनकी हिरासत की अवधि समाप्त होने के बावजूद जेल में रखे जाने को गैरकानूनी बताया है। इस मामले ने पाकिस्तान के राजनीतिक माहौल में एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है।
यह मामला इमरान खान की बहनों अलीमा खान, नूरीन नियाजी और उज्मा खान की हिरासत से जुड़ा है। तीनों को पंजाब के सार्वजनिक व्यवस्था अध्यादेश, 1960 के तहत हिरासत में लिया गया था। यह कानून अधिकारियों को सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा बनाए रखने के लिए एहतियाती तौर पर किसी व्यक्ति को हिरासत में रखने की अनुमति देता है।
तीनों बहनों की हिरासत को चुनौती देते हुए अलीमा खान के बेटे शहरेज खान ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता के वकील राणा मुदस्सर उमर ने अदालत को बताया कि 20 अक्टूबर को 30 दिन की हिरासत अवधि पूरी हो चुकी थी। इसके बावजूद तीनों को जेल में रखा गया है।
लाहौर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति अबहर गुल खान ने याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब के गृह सचिव और कोट लखपत जेल के अधीक्षक को अगली सुनवाई पर पेश होने का आदेश दिया। अदालत ने दोनों अधिकारियों से 28 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करने को भी कहा है।
अब सुनवाई में यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि हिरासत की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी तीनों महिलाओं को जेल में रखने के पीछे प्रशासन का क्या आधार है। अदालत के इस कदम को हिरासत की वैधता से जुड़े सवालों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अपने नेता की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन करने की कोशिश कर रही थी। इसी दौरान उनकी तीनों बहनों को हिरासत में लिया गया था। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार सहित कई मामले दर्ज हैं। उन पर हिंसा भड़काने से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। फिलहाल वह रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद हैं।
पीटीआई लगातार इमरान खान की रिहाई की मांग करती रही है। पार्टी का आरोप है कि उसके नेताओं और समर्थकों के खिलाफ दर्ज मामले राजनीतिक रूप से प्रेरित हैं। वहीं, सरकार का कहना है कि कानूनी कार्रवाई नियमों के अनुसार की जा रही है।
इमरान खान की बहनों की हिरासत का मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान में पीटीआई और सरकार के बीच टकराव जारी है। पार्टी लंबे समय से अपने नेता की रिहाई और उनके खिलाफ चल रहे मामलों को वापस लेने की मांग कर रही है।
इस बीच पीटीआई के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी विवाद बना हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल और गवर्नर शासन लागू किए जाने, प्रांतीय सरकार को निलंबित करने तथा मुख्यमंत्री सहित कई नेताओं को हिरासत में लिए जाने से संबंधित घटनाक्रम ने राजनीतिक तनाव और बढ़ा दिया है।
ऐसे माहौल में इमरान खान की तीनों बहनों की हिरासत पर हाई कोर्ट का रुख पीटीआई के लिए अहम है। हालांकि, अदालत ने अभी उनकी रिहाई का आदेश नहीं दिया है, बल्कि संबंधित अधिकारियों को तलब कर हिरासत के संबंध में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई में मामले की कानूनी स्थिति पर आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
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