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गांधी बनने चले थे… सात दिन में हवा निकल गई…

October 23, 2026

दिल्ली की सड़कों पर आंदोलन का हंगामा… देश के कई शहरों में समर्थन… न्यूज चैनलों की खबरों पर कब्जा… नीट परीक्षा से शुरू हुआ हंगामा चुनाव आयुक्त के विरोध तक इस कदर पहुंचा कि लोगों को लगा कि दुनिया के दूसरे देशों की तरह जेन-जी की सुनामी भारत की ओर बढ़ चुकी है… पहली बार सरकार और प्रधानमंत्री मोदी को राजनीतिक विरोध का इस कदर सामना करना पड़ा कि उनके चेहरे की हवाइयां उड़ने लगीं… बेतरतीब चेहरे के साथ सोशल मीडिया पर हैलो फ्रेंड््स कहते हुए प्रतिक्रिया जाहिर हुई… सूखी गालियों पर इस गीली प्रतिक्रिया में उनका पस्त हौसला नजर आया… भाजपा का कोई नेता भी कुछ खास बचाव नहीं कर पाया… मुर्दा कांग्रेस भी इस आंदोलन में संजीवनी बूटी ढूंढने चली आई… लुप्त नजर आने वाले राहुल, प्रियंका और कांग्रेसी भी सोशल मीडिया पर छाने लगे… देश को लगा सत्ता हिली और पत्ता बिखरा… कमल मुरझाया और विरोधियों ने मौका पाया… लेकिन अनुभव के कच्चे राजनीति के बच्चे उतापा करते हुए जंतर-मंतर के प्रतिबंधित गेट तक तिरंगा लेकर जा पहुंचे और पुलिस ने बिना मौका गंवाए तीन कॉकरोचों को धरदबोचा और उनमें से दो को सात दिन इस कदर जेल में तपाया कि उनकी गांधीगीरी धरी रह गई… सत्याग्रह का आंदोलन भी दम तोड़ गया… गिड़गिड़ाते, बिलबिलाते, शांति भंग न करने का बांड भरा… पचास-पचास हजार की जमानत जुटाई, तब जाकर रिहाई पाई… रिहा होते ही खिसियानी बिल्ली की तरह सरकार को नोंचते दोनों नेताओं ने पत्रकारों के सामने जुल्म-ज्यादती का रोना रोया और घर चल दिए… दोनों की हालत देखकर घबराए दिपके ने भी दिवाली तक आंदोलन से तौबा की और घर-परिवार का रुख कर लिया… जज की टिप्पणी से जन्मे कॉकरोच उसी प्रजाति की तरह तेजी से पनपे और उतनी ही तेजी से मिटते-सिमटते नजर आए… शायद वो समझ नहीं पाए कि गांधी का आंदोलन कोई हुड़दंग नहीं था… उस आंदोलन की कोई उम्र नहीं थी… जेल उनका घर था और देश उनका परिवार… वो अंग्रेजों की क्रूरता से लड़ते नहीं थे, बल्कि स्वयं पर इतना आजमाते थे कि क्रूर अंग्रेज भी उनकी जिद से घबरा जाते थे… उन्होंने न कभी रिहाई की गुहार लगाई और न ही अंग्रेजों की किन्हीं शर्तों को माना… उनका आंदोलन जिहाद था और कॉकरोचों का आंदोलन पिकनिक… दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगा ऐसा मेला, जहां मुफ्त का खाओ और गालियां बककर पचाओ… और सर पर आए तो भाग जाओ… यह साबित भी हुआ… इधर आंदोलन चल रहा था उधर भाजपा दिल्ली यूनिवर्सिटी के चुनाव में जीत का डंका बजा रही थी… यानी छात्रों का इस आंदोलन को कोई समर्थन नहीं था… देश भी कॉकरोचों को पहचान गया…सरकार ने भी दो का गला दबाया… सबको अपने-अपने घर भिजवाया…


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  • संयुक्त राष्ट्र में भारत की दोटूक, सुरक्षा परिषद में सुधार क्यों अटका, पाकिस्तान समेत कुछ देशों पर उठाए सवाल

    Fri Oct 23 , 2026
    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (United Nations)की सुरक्षा परिषद (Security Council)में सुधार को लेकर भारत ने एक बार फिर मौजूदा व्यवस्था (Existing system)पर सवाल उठाए हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश (Permanent Representative P. Harish)ने कहा कि करीब 80 साल पहले हुए द्वितीय विश्व युद्ध के परिणामों के आधार पर आज की […]
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