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भिक्षावृत्ति और अपराध

  डाॅ. रमेश ठाकुर भीख मांगना एक सामाजिक बुराई है, जिसे जड़ से मिटाने के लिए पूर्व में कई तरह के असफल प्रयास हुए। भिक्षावृति में लिप्त इंसान की सामाजिक पहचान खत्म हो जाती है। लोग उसे हिकारत भरी नजरों से देखते है, उसका सामाजिक बहिष्कार होने लगता है। भीख मांगना जारी रहे और उसे […]

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सभ्यता की वाहक और परिवर्तन का इंजन हैं किताबें

विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस (23 अप्रैल) पर विशेष योगेश कुमार गोयल यूनेस्को तथा दुनियाभर के अन्य संबंधित संगठनों द्वारा लेखकों और पुस्तकों को वैसभ्यता की वाहक और परिवर्तन का इंजन हैं किताबेंश्विक सम्मान देने तथा पढ़ने की कला को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष 23 अप्रैल को ‘विश्व पुस्तक दिवस’ मनाया जाता है। […]

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कोरोनाः तालाबंदी हल नहीं है

  डॉ. वेदप्रताप वैदिक कोरोना महामारी इतना विकराल रूप आजकल धारण करती जा रही है कि उसने सारे देश में दहशत का माहौल खड़ा कर दिया है। भारत-पाकिस्तान युद्धों के समय भी इतना डर पैदा नहीं हुआ था, जैसा कि आजकल हो रहा है। प्रधानमंत्री को राष्ट्र के नाम संबोधन देना पड़ा। उन्हें बताना पड़ा […]

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निजी अस्पतालों में ‘सांसों’ की कालाबाजारी !

कौशल यह मजबूरी ही है कि चिकित्सा क्षेत्र में सरकारी व्यवस्थाओं को असंतोषजनक मानते हुए व्यक्ति निजी अस्पतालों की ओर रुख करता है और जब वहां ठगा जाता है तब उसे महसूस होता है कि काश, सरकारी में ही भर्ती हो जाते।…खैर यह तो सामान्य बात हो चुकी है। अबतक तो निजी अस्पताल मोटे बिलों […]

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पाकिस्तान का नया सिरदर्द

  डॉ. वेदप्रताप वैदिक पाकिस्तान में इमरान-सरकार की मुसीबतें एक के बाद एक बढ़ती ही चली जा रही हैं। उसे तहरीके-लबायक पाकिस्तान नामक राजनीतिक पार्टी पर प्रतिबंध भी लगाना पड़ गया और प्रतिबंध के बावजूद उससे बात भी करनी पड़ रही है। इस पार्टी पर इमरान-सरकार ने प्रतिबंध इसलिए लगाया है कि उसने पाकिस्तान के […]

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मानवता का सबसे सुंदर व साकार स्वप्न हैं श्रीराम

  रामनवमी पर विशेष डॉ. अजय खेमरिया राम मानवता की सबसे बड़ी निधि है। वे संसार में अद्वितीय प्रेरणापुंज है। वे शाश्वत धरोहर है मानवीय सभ्यता, संस्कृति और लोकजीवन के। राम जीवन के ऐसे आदर्श हैं जो हर युग में सामयिकता के ज्वलन्त सूर्य की तरह प्रदीप्त है। मर्यादा, शील, संयम, त्याग, लोकतंत्र, राजनय, सामरिक […]

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भगवान राम के जीवन में वनवासी

प्रमोद भार्गव प्राचीन भारतीय संस्कृत ग्रंथों में ‘रामायण’ जनमानस में सबसे ज्यादा लोकप्रिय ग्रंथ है। भारत के सामंत और वर्तमान संवैधानिक भारतीय लोकतंत्र में राम के आदर्श मूल्य और रामराज्य की परिकल्पना प्रकट अथवा अप्रगट रूप में हमेशा मौजूद रही है। अतएव रामायण कालीन मुल्यों ने भारतीय जन-मानस को सबसे ज्यादा उद्वेलित किया है। इस […]

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कोरोना की ऐसी भयावह वापसी के लिए कौन जिम्मेदार

  सुरेन्द्र कुमार किशोरी आज कोरोना महामारी अपने विकराल रूप में सबके सामने है। लोग मर रहे हैं, परिवार के सदस्य परिजनों को खोने के गम में पथराई आंखों से शून्य में निहार रहे हैं। श्मशान में शवदाह की अग्नि जल रही है, श्मशान की भयावहता को देख आमजन की रुह कांपे नहीं, इसलिए श्मशान […]

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वॉर मेमोरियल से मिलेगी देशभक्ति की प्रेरणा

  रमेश सर्राफ देश पर मर मिटने वालों में कायमखानी कौम ने हमेशा मिसाल पेश की हैं। यह मिसाल ताजा नहीं, बल्कि करीब 600 साल से ज्यादा समय से है। यही कारण है कि कायमखानी कौम को महारानी एलिजाबेथ के समय 1901 में गजट नोटिफिकेशन के जरिए मार्शल कौम की उपाधि मिली थी। इस कौम […]

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तबाही मचाती कोरोना की दूसरी लहर

  योगेश कुमार गोयल कोरोना वायरस के दोहरे म्यूटेशन के कारण भारत में संक्रमण की रफ्तार इतनी तेज हो चुकी है कि लगभग सभी राज्यों में कोरोना की इस नई लहर का कहर देखा जा रहा है। दोहरे म्यूटेशन वाले वायरस की मौजूदगी की पुष्टि अभी तक 11 देशों में हो चुकी है, जिसका सबसे […]