
इंदौर। मध्य और उत्तर भारत में टमाटर (Tomato) की बंपर पैदावार (umper harvest) से भाव न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए हैं। चोइथराम मंडी (Choithram Mandi) में टमाटर 3 से 8 रुपए प्रतिकिलो तक बिक रहा है। आवक और मांग का यही अंतर बना रहा तो अगले डेढ़ से दो महीने तक भाव कमजोर रहने की उम्मीद है। इससे आम उपभोक्ताओं को भी सस्ता टमाटर मिलने का लाभ मिलेगा, जबकि किसानों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो रहा है।
पिछले साल इसी सीजन में टमाटर 25 से 35 रुपए किलो तक बिका था। अच्छे भाव की उम्मीद में इस बार निमाड़ सहित राजगढ़, शाजापुर, शिवपुरी और गुना के किसानों ने बड़े पैमाने पर फसल लगाई, लेकिन अधिक उत्पादन ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। दाम इसी प्रकार रहे तो किसान खेतों में ही टमाटर की फसल को नष्ट कर सकता है, क्योंकि उसे मजदूरी और ट्रांसपोर्टेशन दोनों की लागत निकालना अब भारी पड़ रहा है, वही आम उपभोक्ता के लिए टमाटर सस्ते दामों पर उपलब्ध रहेंगे।
खपत से 3 हजार कैरेट ज्यादा पहुंच रहा टमाटर
चोइथराम मंडी में रोजाना खपत करीब 7 हजार कैरेट है, जबकि आवक 10 हजार कैरेट तक पहुंच रही है। एक कैरेट में करीब 25 किलो टमाटर होता है। साधारण टमाटर 3 से 6 रुपए और बेहतर गुणवत्ता वाला टमाटर अधिकतम 8 रुपए किलो तक बिक रहा है।
एक कैरेट पर 100 रु. खर्च
किसानों को एक कैरेट टमाटर खेत से मंडी तक लाने में करीब 100 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। इसमें लगभग 50 रुपए तुड़ाई और पैकिंग के लिए कैरेट पर तथा 50 रुपए परिवहन पर लगते हैं। ऐसे में कम भाव पर उपज बेचने से किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
डेढ़ से दो महीने तक भाव कमजोर रहने की आशंका
साईंकृपा ट्रेडिंग के योगेश वीरहे के अनुसार, अगले डेढ़ से दो महीने तक भाव कमजोर बने रहने की उम्मीद है। मौसम में बड़ा बदलाव आने या आवक घटने पर ही कीमतों में सुधार हो सकता है।
मंडी में शेड बढ़ाने की मांग
स्थानीय क्षेत्रों के अलावा महाराष्ट्र से भी टमाटर की आवक होती है। व्यापारियों के मुताबिक, मंडी में कैरेट रखने के लिए पर्याप्त शेड नहीं हैं। उन्होंने 30 से 35 हजार कैरेट की क्षमता वाला शेड बनाने की मांग की है, ताकि अधिक आवक के दौरान कारोबार व्यवस्थित रह सके।
टमाटर बाजार एक नजर में
– रोजाना खपत: 7,000 कैरेट
– अधिकतम आवक: 10,000 कैरेट
– एक कैरेट: करीब 25 किलो
– मंडी भाव: 3 से 8 रुपए प्रतिकिलो
– खेत से मंडी तक खर्च: करीब 100 रुपए प्रति कैरेट
– व्यापारियों की मांग: 30 से 35 हजार कैरेट क्षमता वाला शेड
दाम गिरने से जूस कंपनियों की बल्ले-बल्ले
कम भाव से सॉस, प्यूरी और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद बनाने वाली इकाइयों को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। अधिक उत्पादन के समय प्रसंस्करण की बेहतर व्यवस्था होने से टमाटर की बर्बादी कम करने और किसानों को राहत देने में भी मदद मिल सकती है।
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