
इंदौर। गुलाबी ठंड की आहट के साथ कल पवित्र शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima), दुर्लभ योगों (Rare planetary combinations) में मनाई जाएगी । शहर के राधा कृष्ण (Radha Krishna) व विष्णु मंदिरों (Vishnu temples) में प्रतिमाओं का शृंगार सफेद फूलों से किया जाएगा, वहीं सायंकाल दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। बाग-बगीचों में खीर प्रसाद बनेगा और गरबों और रास उल्लास का रंग शहर में जमेगा ।
रविवार को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी । आचार्य पंडित नवीन उपाध्याय ने बताया कि इस बार शरद पूर्णिमा पर कई दुर्लभ और शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जिससे पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है। कल शाम 7.22 से लेकर 26 को सुबह 6.29 तक सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ लक्ष्मी नारायण राजयोग, हर्षण और वज्र योग का संयोग भी कल रहेगा। शरद पूर्णिमा को कोजागर पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस रात्रि भगवती महालक्ष्मी यह देखने के लिए भ्रमण पर निकलती हैं कि कौन जाग रहा है। जो भक्त जागकर माता की आराधना करते हैं, उन्हें माता लक्ष्मी धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने रासलीला भी रची थी। पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर सुबह 11.59 से 26 अक्टूबर सुबह 9.41 बजे तक रहेगी। इंदौर में चंद्रोदय शाम 5 बजकर 12 मिनट पर होगा। कल चांदनी रात्रि में गाय के दूध से बनी खीर भगवान को भोग लगाई जाती है। खीर से भरे पात्र को रात में खुली चांदनी में रखा जाता है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है।
यह है शरद पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व
वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार शरद पूर्णिमा पर औषधियों की स्पंदन क्षमता अधिक होती है। सोमचक्र, नक्षत्रीय चक्र और आश्विन के त्रिकोण के कारण शरद ऋतु से चन्द्रमा में ऊर्जा का संग्रह होता है दुग्ध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है। शोध के अनुसार खीर को चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधकता अधिक होती है।
कल होंगे आयोजन,औषधियुक्त खीर बंटेगी
बालकृष्ण बाग में शाम 7 बजे रास गरबा आयोजित किया जाएगा। प्रो. सुमित त्रिवेदी व निलेश उपाध्याय ने बताया कि परंपरागत भारतीय वेशभूषा के माध्यम से ही प्रवेश मिलेगा । हंसदास मठ में विश्व ब्राह्मण संघ द्वारा गरबा प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। श्री बर्फानी धाम, मालवीय नगर पर औषधियुक्त खीर का पारंपरिक वितरण किया जाएगा। महामंडलेश्वर भरतदास महाराज ने बताया कि भगवान धन्वंतरि का पूजन-अर्चन किया जाएगा। शुभम नगर संगम नगर के पास देवी जागरण होगा।
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