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हस्ताक्षर जालसाजी मामले में अभिषेक बनर्जी से 6 घंटे पूछताछ, CID दफ्तर से निकलकर ममता बनर्जी से मिले

June 12, 2026

कोलकाता। विपक्ष के नेता के चयन से जुड़े कथित हस्ताक्षर जालसाजी मामले (Fraud cases) में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) से गुरुवार को सीआईडी अधिकारियों ने करीब छह घंटे तक पूछताछ की। लंबी पूछताछ के बाद वह देर रात सीआईडी मुख्यालय से निकले और सीधे ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंचे।

कलकत्ता हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिलने के बाद अभिषेक बनर्जी शाम करीब 5:50 बजे सीआईडी मुख्यालय पहुंचे थे। पूछताछ का सिलसिला देर रात तक चला और वह लगभग 11:30 बजे भवन से बाहर निकले। इस दौरान उन्होंने मीडिया के किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया।

तीन समन के बाद हुई पेशी
सीआईडी इससे पहले अभिषेक बनर्जी को तीन बार समन भेज चुकी थी, लेकिन उन्होंने स्वास्थ्य कारणों और उच्च न्यायालय में लंबित याचिका का हवाला देते हुए पेशी से छूट मांगी थी। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद यह पहला मौका है जब उन्हें किसी राज्य जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होना पड़ा। इससे पहले कोयला तस्करी और स्कूल भर्ती घोटाले जैसे मामलों में उनसे ईडी और सीबीआई कई बार पूछताछ कर चुकी हैं।


  • एयरपोर्ट पर लगे नारे
    दिल्ली दौरे से लौटे अभिषेक बनर्जी गुरुवार शाम कोलकाता पहुंचे। वह पिछले तीन दिनों से राष्ट्रीय राजधानी में थे, जहां उन्होंने विपक्षी गठबंधन के नेताओं, जिनमें राहुल गांधी भी शामिल हैं, के साथ बैठकें की थीं।

    कोलकाता एयरपोर्ट पर उनके पहुंचते ही कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी की और ‘सिग्नेचर चोर’ के नारे लगाए। इसके बाद वह कुछ समय के लिए अपने कालीघाट स्थित आवास गए और फिर अदालत द्वारा तय समय सीमा से पहले कड़ी सुरक्षा के बीच भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय पहुंच गए।

    क्या है पूरा विवाद?
    सीआईडी के अनुसार, 20 मई को अभिषेक बनर्जी ने विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजकर विधानसभा में विपक्ष के नेता और अन्य पदों पर पार्टी की अनुशंसाओं को दोहराया था। इसमें सोभनदेब चट्टोपाध्याय, असीम पात्रा, नैना बंद्योपाध्याय और फिरहाद हकीम के नाम शामिल थे।

    मामले ने तब तूल पकड़ा जब टीएमसी से निष्कासित दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की कि 6 मई को हुई पार्टी बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किया गया और उसमें हस्ताक्षरों की जालसाजी की गई।

    फोरेंसिक जांच के लिए मांगी गई मूल प्रति
    सीआईडी ने 28 मई को मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। इससे पहले हरे स्ट्रीट थाने में विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया था कि वह प्रस्ताव पुस्तिका की मूल प्रति लेकर उपस्थित हों, ताकि दस्तावेज पर मौजूद हस्ताक्षरों की सत्यता की पुष्टि के लिए फोरेंसिक परीक्षण कराया जा सके। फिलहाल सीआईडी मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच में जुटी हुई है।

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