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अधिक मास 2026: 13वें महीने का पूरा मार्गदर्शन, कब से कब तक रहेगा और क्या करना चाहिए

March 13, 2026

नई दिल्ली। साल 2026(In the year 2026) में हिंदू कैलेंडर के अनुसार विक्रम संवत 2083(specifically during Vikram Samvat 2083) में 12 महीनों की बजाय 13 महीनों(13 months instead of the usual 12.) का आयोजन होगा। यह अतिरिक्त महीना अधिकमास या पुरुषोत्तम मास(Adhik Maas or Purushottam Maas) कहलाता है और हर 3 साल में आता है। इस वर्ष अधिक मास(This year, Adhik Maas) ज्येष्ठ(Jyeshtha) महीने में पड़ेगा और इसका महत्व विशेष रूप से भगवान विष्णु से जुड़ा हुआ है।

अधिक मास 2026 की तारीखें
पंचांग के अनुसार, अधिक मास 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इस अतिरिक्त महीने के कारण ज्येष्ठ मास की सभी तिथियां दोगुनी हो जाएंगी, यानी चतुर्थी, एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा और अन्य व्रत व त्योहारों की संख्या बढ़ जाएगी। उदाहरण के लिए, रक्षाबंधन 2026 में 28 अगस्त को मनाया जाएगा और दिवाली 8 नवंबर को।

अधिक मास क्यों आता है?
अधिक मास का कारण सौर और चंद्र वर्ष के बीच अंतर है। सौर वर्ष लगभग 365 दिन का होता है, जबकि चंद्र वर्ष लगभग 354–355 दिन का होता है। इस तरह हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर बनता है, जो 3 साल में लगभग 32–33 दिन हो जाता है। इसे संतुलित करने के लिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है, जिसे अधिक मास कहते हैं।

अधिक मास में क्या करें:

प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा और मंत्रों का जाप करें, क्योंकि इस महीने में उनकी आराधना का विशेष फल मिलता है।

जप, तप, दान-पुण्य और भक्ति में समय व्यतीत करें। इससे पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य आता है।

गरीबों को अन्न, वस्त्र और आवश्यक मदद दें। उनकी सेवा करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है।

गीता का पाठ करना और धार्मिक कथाओं का अध्ययन करना लाभदायक रहेगा।

अधिक मास में क्या न करें:

विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, भूमि पूजन या नए व्यापार जैसी शुभ गतिविधियां करने से बचें। इस महीने का ध्यान केवल भक्ति और पुण्य कर्मों में लगाना चाहिए।नॉनवेज और शराब का सेवन बिल्कुल न करें। इससे दोष लगता है और दुर्भाग्य, गरीबी और बीमारियां आती हैं।कमजोर या असहाय लोगों का अपमान या उत्पीड़न न करें।


  • इस तरह साल 2026 का अधिक मास भक्तों के लिए पुण्य और भक्ति का अवसर है। इस महीने का सही पालन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक लाभ सुनिश्चित होता है।

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