
शिमला. नई दिल्ली (New Delhi) में भारत मंडपम (Bharat Mandapam) में 19 फरवरी को एआई समिट (AI Summit) में शर्टलेस प्रदर्शन करने के आरोपी तीन यूथ वर्करों (Three youth workers) की गिरफ्तारी को लेकर हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की राजधानी शिमला में खूब हंगामा हुआ. करीब 20 घंटे तक चले इस ड्रामे का अंत गुरुवार सुबह छह बजे हुआ. इस पूरे विवाद में हिमाचल प्रदेश और दिल्ली पुलिस आमने-सामने रही. दोनों राज्यों की पुलिस में जमकर तकरार देखने को मिली. आखिरकार, दिल्ली पुलिस को प्रदेश पुलिस के सामने झुकना पड़ा और फिर पूरी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए ही तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और उन्हें लेकर पुलिस दिल्ली चली गई. अहम बात है कि दिल्ली के अलावा, हरियाणा पुलिस के जवान भी इस कार्रवाई में शामिल थे.
दरअसल, बुधवार को दिल्ली पुलिस के 20 जवानों की टीम ने हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू के चिड़गांव में दस्तक दी. यहां पर एआई समिट के दौरान शर्टलेस प्रदर्शन में शामिल तीन यूथ कांग्रेस के वर्करों को पुलिस ने अरेस्ट किया और वापस दिल्ली ले जा रही थी. इस दौरान सोलन के धर्मपुर में हिमाचल प्रदेश पुलिस ने दिल्ली पुलिस के 20 जवानों की टीम को हिरासत में ले लिया और कहा कि तीन वर्करों को अवैध तरीके से गिरफ्तार किया गया है. शिमला पुलिस तीनों आरोपियों और दिल्ली पुलिस के जवानों को शिमला की लेकर चक्कर जिला अदालत पहुंची और यहां पर आरोपियों को कोर्ट में पेश किया. हालांकि, जज ने सभी को गुरुवार को पूरी कार्रवाई की डिटेल के लिए आने के लिए कहा और 24 घंटे का समय दिया.
शोघी बैरियर पर जमकर हुआ बवाल
कोर्ट से दिल्ली पुलिस के जवान तीनों आरोपियों को लेकर फिर से दिल्ली के लिए निकले, लेकिन शिमला के शोघी बैरियर पर पुलिस ने सभी को फिर से रोक लिया और यहां पर जमकर ड्रामा देखने को मिला.दोनों राज्यों की पुलिस के बीच इस दौरान काफी बहसबाजी होती रही. एएसपी शिमला अभिषेक और दिल्ली के एसीपी रोहित के बीच यहां पर खूब बहसबाजी हुई. एएसपी शिमला ने एसीपी से कहा कि उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर कोई भी कागज नहीं दिखाए. साथ ही प्रोटोकॉल को फोलो नहीं किया. इस दौरान कालका शिमला हाईवे पर जाम भी लग गया और लोगों को भारी परेशानी हुई. करीब दो घंटे तक टकराव के बाद आखिरकार दिल्ली पुलिस को फिर से शिमला लौटना पड़ा और शिमला के डीडीयू अस्पताल में तीनों आरोपियों को मेडिकल करवाया गया. बाद में आरोपियों को कोर्ट में पेश किया और जहां से अदालत ने तीनों आरोपियों को ट्रांजिस रिमांड पर दिल्ली पुलिस को सौंप दिया.
दिल्ली पुलिस को हिमाचल पुलिस ने फिर से शोघी में रोका
दिल्ली पुलिस आरोपियों को लेकर गुरुवार सुबह दिल्ली के लिए निकली तो फिर से शिमला पुलिस ने शोघी बैरियर पर उन्हें रोक लिया. हालांकि, यहां पर हाई-वोल्टेज ड्रामा आखिरकार खत्म हो गया. करीब दो घंटे की नोकझोंक के बाद दिल्ली पुलिस सुबह लगभग 6 बजे शोघी बैरियर से रवाना हो गई.
शोघी बैरियर पर शिमला पुलिस का आरोप था कि दिल्ली पुलिस गलत तरीके से होटल की डीवीआर लेकर जा रही है और जिस गाड़ी में केस से जुड़े सबूत रखे गए हैं, उसकी तलाशी जरूरी है. शोघी बैरियर पर शिमला पुलिस के पूछने के बावजूद दिल्ली पुलिस के अधिकारी वाहन से नीचे नहीं उतरे. शिमला पुलिस ने गाड़ी की चाबी और सहयोग मांगा, लेकिन दिल्ली पुलिस ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि वाहन में केस प्रॉपर्टी है, इसलिए चाबी नहीं दी जा सकती. दिल्ली पुलिस के एसीपी राहुल ने मीडिया से कहा कि ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद आरोपियों को दिल्ली ले जाया जा रहा था, लेकिन शिमला पुलिस कार्रवाई में बाधा डाल रही है. वहीं, शिमला पुलिस ने चेतावनी दी थी कि सहयोग न मिलने पर गाड़ी को सीज़ किया जाएगा.आखिरकार दिल्ली पुलिस ने शिमला पुलिस को सीज़र मेमो सौंप दिया और अपने साथ डीवीआर तथा आरोपियों की ज़ब्त थार गाड़ी भी लेकर रवाना हो गई.
दिल्ली पुलिस पर किडनैपिंग का केस
इस पूरे विवाद को लेकर जब शिमला जिला अदालत से आरोपियों को लेकर दिल्ली पुलिस जा रही थी तो शोघी के पास हिमाचल पुलिस ने उन्हें रोका और बताया कि दिल्ली पुलिस पर किडनैपिंग का केस दर्ज किया गया है. शिमला के रोहड़ू के चिड़गांव के मांदली स्थित रिजॉर्ट के मालिक ने चिड़गांव थाने में केस दर्ज करवाया है कि उनके रिजॉर्ट में तीन यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता ठहरे हुए थे और बुधवार को सुबह करीब 15–20 अज्ञात लोग सादे कपड़ों में गाड़ियों में सवार होकर आए और वहां ठहरे तीन युवकों को जबरन अपने साथ ले गए. शिकायत में यह भी कहा गया है कि रिजॉर्ट परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों का डीवीआर भी बिना किसी फर्द या रसीद के अपने साथ ले जाया गया. शिकायत के आधार पर पुलिस ने थाना चिरगांव में मामला दर्ज कर लिया है. यहां तक कि दिल्ली पुलिस ने मामले की जानकारी लोकल पुलिस को भी नहीं दी. गौरतलब है कि दिल्ली और हरियाण नंबर की पांच गाड़ियों में दिल्ली पुलिस आई थी.
दिल्ली में भी हिमाचल पुलिस पर केस दर्ज
दिल्ली पुलिस के सूत्रों के मुताबिक, हिमाचल में 3 लोगों की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की टीम आरोपियों को लेकर वापस आ रही थी, लेकिन हिमाचल पुलिस ने दिल्ली पुलिस को सोलन में रोक दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने भी एक क्रॉस एफआईआर दर्ज की है, जिसमें सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने के आरोप लगाए गए हैं.
कोर्ट ने दिया ट्रांजिट रिमांड
दिल्ली पुलिस के वकील नंद लाल ने बताया कि एसीजेएम कोर्ट ने तीनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली पुलिस के हवाले कर दिया है. अब दिल्ली पुलिस आरोपियों को दिल्ली ले जाकर वहां के मजिस्ट्रेट के सामने पेश करेगी. गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस ने जिला शिमला के रोहड़ू क्षेत्र से उत्तर प्रदेश के सौरभ सिंह और अरबाज़ ख़ान तथा मध्य प्रदेश के सिद्धार्थ अवधूत को गिरफ्तार किया था. अब दिल्ली पुलिस तीनों आरोपियों को दिल्ली में स्थानीय मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करेगी. याचिकाकर्ता के वक़ील संदीप दत्ता ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने एक प्रॉपर प्रोसीजर फोलो नहीं किया था. अवैध तरीके से तीनों आरोपियों को पकड़ा गया था.
पूर्व सीएम ने सुक्खू सरकार पर किया जुबानी हमला
पूर्व सीएम एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने हिमाचल पुलिस के उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है, जिन्होंने यहां आरोपियों को पकड़ने के लिए आई दिल्ली पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की. मंडी में पत्रकारों से बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. राहुल गांधी के ईशारों पर प्रदेश सरकार ने दिल्ली स्थित हिमाचल भवन में एआई समिट में खलल डालकर देश की छवि को खराब करने की सारी योजना बनाई. उसके बाद तीन आरोपियों को एक चुने हुए प्रतिनिधि की गाड़ी से हिमाचल लाकर उन्हें रोहड़ू में सरकारी पनाह में रखा गया. जब दिल्ली पुलिस यहां इन आरोपियों को गिरफ्तार करने आई तो सोलन जिला के धर्मपुर में पुलिस टीम को ही डिटेन कर दिया गया, लेकिन जब कोर्ट में एसपी सही जबाव नहीं दे पाए, लेकिन पुलिस ने जो भी कार्रवाई की वो निदंनीय है और ऐसा प्रदेश के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ. उधर, सुक्खू सरकार की तरफ से इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. शिमला के एसपी गौरव सिंह भी जिला अदालत में पेश हुए थे, लेकिन उन्होंने भी मीडिया से बात नहीं की थी.
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