
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में तैनात अमेरिका (America) की नौसैनिक ताकत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। दुनिया का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड (USS Gerald R. Ford) करीब 300 दिनों की लंबी तैनाती के बाद अब अमेरिका लौट रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह युद्धपोत जल्द ही अपने होमपोर्ट वर्जीनिया के लिए रवाना होगा और मई के मध्य तक पहुंचने की संभावना है। इस तैनाती को वियतनाम युद्ध के बाद अमेरिकी नौसेना की सबसे लंबी तैनातियों में से एक माना जा रहा है।
इस दौरान यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड ने कई अहम अभियानों में हिस्सा लिया। इसमें ईरान से जुड़े तनावपूर्ण हालात, वेनेजुएला में निकोलस मादुरो से जुड़े ऑपरेशन और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के दौरान तैनाती शामिल रही। पिछले कुछ हफ्तों में इस क्षेत्र में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी बेहद मजबूत रही, जहां USS जॉर्ज बुश और USS अब्राहम लिंकन जैसे अन्य विमानवाहक पोत भी सक्रिय थे। इसे 2003 के बाद सबसे बड़ा नौसैनिक जमावड़ा माना गया।
यह पूरा मिशन पिछले साल जून में अमेरिका के नॉरफॉक से शुरू हुआ था। जहाज ने पहले भूमध्य सागर, फिर कैरेबियन क्षेत्र और उसके बाद मध्य पूर्व का रुख किया, जिससे यह एक बहु-क्षेत्रीय सैन्य ऑपरेशन बन गया। हालांकि, इतनी लंबी तैनाती के दौरान कई चुनौतियां भी सामने आईं। रिपोर्ट्स के अनुसार जहाज में तकनीकी खराबी, आग लगने की घटनाएं और क्रू पर मानसिक व शारीरिक दबाव जैसी समस्याएं देखने को मिलीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि USS जेराल्ड फोर्ड की वापसी इस बात का संकेत है कि अमेरिका पश्चिम एशिया में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को कुछ हद तक कम कर रहा है, हालांकि क्षेत्र में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, लंबे मिशन के दौरान ऑपरेशनल जरूरतों और मेंटेनेंस के बीच संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होता है, और इसी वजह से यह वापसी की जा रही है।
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