
नारी शक्ति पर भारी पड़ेगी पति की भक्ति…
कितना भी आरक्षण (Reservation) दे दो… महिलाओं (Women) के नाम पर राज (Rule) तो पुरुष (man) ही करेगा… कभी पार्षद पति के नाम पर, कभी विधायक पति बनकर… घोटाला वो करेगा, बदनाम पत्नी होगी… दलाली की दुकान भी जमकर चलेगी… इस देश की पारिवारिक व्यवस्था में पुरुष प्रधान है… पति भगवान है… पुरुषों का ही मान-सम्मान है… शाम ढलते ही महिलाएं परिवार की हो जाती हैं… दिनभर बच्चों को संभालती हंै… जिम्मेदारियों का बोझ उठाती हैं… इसीलिए महिलाएं पूजी जाती हैं… अब महिलाओं को राजनीति में लाना चाहते हैं… लाना क्या घसीटना चाहते हैं… रंजिशों और द्वेष के दलदल में धकेलना चाहते हैं… चापलूसी की जिल्लतें थोपना चाहते हैं… शौक से थोपिए… लेकिन वो केवल सीढ़ी बनकर रह जाएगी, जिस पर चढक़र पुरुष मंजिल बनाएगा… जो महिला पुरुष की इस मंशा को ठुकराएगी… वो दर-दर की ठोकरें खाएगी… न घर की न घाट की रह जाएगी… फिर संस्कृति की दुहाई दी जाएगी… महिलाओं के रात में घर से निकलने पर रोक लगाई जाएगी… बाहर भी पति के साथ ही वो जा पाएगी… यदि काम करने वाली महिलाओं की टोली बनाएगी तो टोली भी ठिठोली बन जाएगी… राजनीति के लिए परिपक्व महिलाओं का मिल पाना, अनुभवियों को शिखर पर लाना, इतनी बड़ी तादाद में जुटाना संभव नहीं हो पाएगा… जो लोग महिलाओं की तरक्की की ख्वाहिशों में नारे लगा रहे हैं उनके राजनीतिक सफलता हासिल करने के लिए आरक्षण पर मुहर लगा रहे हैं… वो भी पत्नी के इस्तेमाल से बाज नहीं आएंगे… टिकट पत्नी को दिलाएंगे… उसे हर पैंतरे आजमाकर जिताएंगे, लेकिन फिर जीत की कीमत वसूलने लग जाएंगे… वर्तमान में नगरीय निकाय के चुनाव में महिलाओं के लिए मौजूदा आरक्षण व्यवस्था का अंजाम हम हर दिन देखते हैं… पार्षद पत्नी होती है, सदन में पति आसन जमाते हैं… कभी-कभी हकाले भी जाते हैं, लेकिन पत्नी की राजनीति पार्षद पति ही चलाते हैं और हालत यह होती है कि एक-एक घर में दो-दो नेता हो जाते हैं… इस हकीकत को और इस चुनौती को भारत जैसे देश में समझना और इससे लडऩा आसान नहीं होता है… इसलिए आरक्षण की मजबूरी और मंजूरी के बिना ही पहले महिलाओं को तराशना और तराशी हुई महिलाओं को राजनीति में लाना चाहिए… तादाद की बंदिशें कहीं मजबूर तो कहीं मगरूर महिलाओं को सत्ता की सीढिय़ों पर लाकर खड़ा कर देगी… अभी हम नेताओं से लड़ रहे हैं, फिर मुखौटों से भी लडऩा पड़ेगा… नारी भारी बने या न बने, पतियों की आभारी बनकर देश का बोझ बढ़ाएगी…
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