वॉशिंगटन। पाकिस्तान में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों (United States Department of State) ने बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने कराची (Karachi) और लाहोर (Lahore) स्थित अपने वाणिज्य दूतावासों में तैनात गैर-आपातकालीन कर्मचारियों (non-emergency employees) और उनके परिवारों को तुरंत पाकिस्तान छोड़ने का आदेश दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर पाकिस्तान तक पहुंच गया है।
रिपोर्टों के मुताबिक 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद पाकिस्तान में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। खासकर कराची और लाहौर में अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों के बाहर बड़ी संख्या में लोग जुटे और प्रदर्शन किए।
कराची में कुछ प्रदर्शनकारियों ने दूतावास परिसर में घुसने की कोशिश भी की, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
वीजा सेवाएं भी रद्द
मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों शहरों में स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावासों ने 6 मार्च तक सभी वीजा अपॉइंटमेंट पहले ही रद्द कर दिए थे। अमेरिकी दूतावास ने अपने बयान में कहा कि सुरक्षा जोखिमों के कारण कर्मचारियों की संख्या अस्थायी रूप से घटाई जा रही है।
हालांकि पाकिस्तान की राजधानी Islamabad में स्थित अमेरिकी दूतावास की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई गई है।
यात्रा चेतावनी भी जारी
अमेरिकी विदेश विभाग ने अपनी यात्रा सलाह में कहा है कि पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों और हिंसक गतिविधियों का खतरा बना हुआ है। चेतावनी में कहा गया है कि आतंकी बिना किसी पूर्व सूचना के भीड़भाड़ वाले स्थानों—जैसे बाजार, होटल, मॉल, परिवहन केंद्र, हवाई अड्डे, स्कूल, धार्मिक स्थल और सरकारी इमारतों—को निशाना बना सकते हैं।
अन्य देशों से भी कर्मचारियों को हटाने की अनुमति
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने Saudi Arabia, Oman और Cyprus से भी गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवारों को स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में जारी संघर्ष और विरोध प्रदर्शनों के कारण अमेरिकी संस्थानों की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है, इसलिए यह कदम एहतियात के तौर पर उठाया गया है।
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