
नई दिल्ली। बॉलीवुड (Bollywood) के महानायक अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) आज 83 साल की उम्र में भी अपनी मेहनत और समर्पण से नई पीढ़ी के लिए मिसाल बने हुए हैं। कई गंभीर बीमारियों (Serious Diseases) से जूझने के बावजूद उन्होंने कभी अपने काम पर इसका असर नहीं पड़ने दिया।
करियर के अहम दौर में हुआ टीबी
अमिताभ बच्चन को साल 2000 में टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) हो गया था। यह वही समय था जब वे अपने करियर के सबसे महत्वपूर्ण टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति के पहले सीजन की शूटिंग शुरू करने जा रहे थे। इस बीमारी ने उनके जीवन को काफी चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
रीढ़ की हड्डी में हुआ था टीबी
एक्टर ने ‘वर्ल्ड टीबी डे’ के मौके पर अपनी इस गंभीर बीमारी का जिक्र करते हुए बताया था कि उन्हें रीढ़ की हड्डी में टीबी हो गया था। इसके कारण उन्हें असहनीय दर्द सहना पड़ता था। उन्होंने खुलासा किया था कि वे न ठीक से बैठ पाते थे और न ही लेट पाते थे।
दर्द में गुजरते थे दिन, खानी पड़ती थीं गोलियां
अमिताभ ने बताया कि उस दौरान उन्हें दिन में 8 से 10 तक दर्द की गोलियां लेनी पड़ती थीं, ताकि वे किसी तरह सामान्य जीवन जी सकें। करीब एक साल तक उनका सख्त इलाज चला, जिसके बाद उन्होंने इस बीमारी पर काबू पाया।
टीबी से लड़कर बने जागरूकता का चेहरा
अपनी इस बीमारी से उबरने के बाद अमिताभ बच्चन ने टीबी के प्रति जागरूकता फैलाने का भी काम किया। उन्होंने कहा कि उनकी मेडिकल हिस्ट्री काफी जटिल रही है और यही कारण है कि वे इस बीमारी को लेकर लोगों को जागरूक करना अपना कर्तव्य मानते हैं।
लोगों को दी अहम सलाह
अमिताभ ने लोगों को सलाह दी कि टीबी जैसी बीमारी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। उनका कहना है कि अगर वे खुद इस बीमारी से पीड़ित हो सकते हैं, तो कोई भी इससे अछूता नहीं है। सही समय पर इलाज और सावधानी से इस बीमारी को हराया जा सकता है।
प्रेरणा बनी संघर्ष की कहानी
आज अमिताभ बच्चन की यह कहानी उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनका उदाहरण बताता है कि हिम्मत और सही इलाज से किसी भी बीमारी को मात दी जा सकती है।
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