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बिना धूप और बारिश के खेती का प्रयोग, चीन की बंद खदानों में नियंत्रित वातावरण के जरिए फसल उगाने की योजना

September 10, 2026

नई दिल्ली । खेती (Farming) के लिए आमतौर पर खुली जमीन, पर्याप्त धूप, पानी और अनुकूल मौसम जरूरी माना जाता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण सूखा, अत्यधिक बारिश (Excessive Rainfall)और बदलता मौसम कृषि (Agriculture) के लिए चुनौती बन रहा है। इसी के बीच चीन (China) में खेती को जमीन के नीचे ले जाने की तकनीक पर काम करने की योजना सामने आई है।

इस योजना के तहत बंद हो चुकी कोयला खदानों की खाली जगह का इस्तेमाल अंडरग्राउंड फार्म के रूप में करने की तैयारी है। इन खदानों के भीतर पौधों के लिए रोशनी, पानी, तापमान और हवा जैसी जरूरी परिस्थितियों को नियंत्रित किया जा सकेगा। इस तकनीक का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में अंतरिक्ष में खेती के लिए जरूरी तकनीकों को विकसित करना भी है।

जमीन के कई मीटर नीचे प्राकृतिक सूर्य की रोशनी पहुंचना संभव नहीं होती। इसलिए अंडरग्राउंड खेती में कृत्रिम रोशनी अहम भूमिका निभाएगी। खदानों के अंदर ऐसी लाइटिंग व्यवस्था तैयार की जा सकती है, जो पौधों की वृद्धि के लिए जरूरी रोशनी उपलब्ध कराए। बंद खदानों में पहले से मौजूद बिजली आपूर्ति और वेंटिलेशन व्यवस्था को भी खेती की जरूरत के अनुसार इस्तेमाल करने की संभावना देखी जा रही है।

इस व्यवस्था में बाहर के मौसम का असर भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। दिन हो या रात, बारिश हो या तेज धूप, खदान के अंदर पौधों के लिए अलग नियंत्रित वातावरण बनाया जा सकेगा। इससे खेती को प्राकृतिक मौसम की परिस्थितियों से अलग रखकर प्रयोग करने का अवसर मिलेगा।

जमीन के अंदर तापमान अपेक्षाकृत स्थिर रहने का फायदा भी उठाया जा सकता है। इसके लिए जियोथर्मल एनर्जी यानी धरती के भीतर मौजूद गर्मी के इस्तेमाल की योजना है। इससे अंडरग्राउंड फार्म में पौधों के लिए जरूरी तापमान बनाए रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने की दिशा में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

कोयला खदानों में जमा पानी इस व्यवस्था के लिए एक अलग चुनौती है। ऐसे पानी में रसायन और भारी धातुएं मौजूद हो सकती हैं, जिससे इसे सीधे सिंचाई में इस्तेमाल करना संभव नहीं होता। इसके लिए मेम्ब्रेन सेपरेशन जैसी जल शोधन तकनीक का उपयोग करने की योजना है। इस प्रक्रिया से नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों को अलग करने के बाद पानी का इस्तेमाल कुछ फसलों की सिंचाई में किया जा सकता है। चाय और रेपसीड जैसी फसलों का भी इस संदर्भ में उल्लेख किया गया है।

इस प्रयोग का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नियंत्रित वातावरण में पौधों की वृद्धि को समझना है। वैज्ञानिक यह जानने का प्रयास करेंगे कि प्राकृतिक परिस्थितियों के बिना रोशनी, पानी, हवा और तापमान को किस तरह नियंत्रित किया जा सकता है। इसके साथ कार्बन का पौधों पर प्रभाव भी अध्ययन का हिस्सा होगा।

इस तकनीक का संबंध भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों से भी है। चांद या मंगल जैसे स्थानों पर लंबे समय तक मानव उपस्थिति के लिए भोजन उत्पादन एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी। वहां सामान्य वातावरण और खेती की परिस्थितियां उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में नियंत्रित वातावरण में जमीन के नीचे खेती से जुड़ी तकनीक उपयोगी हो सकती है।

चीन में पिछले एक दशक में करीब 12 हजार कोयला खदानें बंद की जा चुकी हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या बढ़ने की संभावना बताई गई है। इन खदानों की विशाल खाली जगहों का इस्तेमाल अंडरग्राउंड कृषि के लिए किया जा सकता है। हालांकि बड़े स्तर पर इसे लागू करने से पहले बिजली की जरूरत, तापमान और हवा का नियंत्रण, पानी की गुणवत्ता, खदानों की सुरक्षा और वहां काम करने वाले लोगों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर समाधान जरूरी होगा।


  • फिलहाल इस तकनीक को बड़े पैमाने पर तैयार कृषि मॉडल मानना जल्दबाजी होगी। इसका प्रमुख उद्देश्य बंद खदानों को सुरक्षित और उपयोगी कृषि अनुसंधान केंद्रों में बदलने की संभावनाओं को समझना है। सफल होने पर यह प्रयोग प्राकृतिक मौसम से अलग नियंत्रित परिस्थितियों में खेती और भविष्य की अंतरिक्ष कृषि के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी आधार तैयार कर सकता है।

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