
इंदौर में दोस्त से अर्जेंट मांगे पैसे, शंका होने पर वह पहुंच गया साइबर सेल, केवल एक लाख गए
इंदौर। भोपाल (Bhopal) में परीक्षा (Examination) की तैयारी कर रही इंदौर (Indore) की एक छात्रा डिजिटल अरेस्ट (digitally arrested) का शिकार हो गई थी, लेकिन उसके दोस्त के कारण उसके केवल एक लाख रुपए ही गए। दोस्त राज्य साइबर सेल पहुंचा और मामला बताया। पुलिस ने तुरंत भोपाल में उससे संपर्क किया और उसे अधिक राशि डालने से रोक लिया। वहीं भोपाल में केस भी दर्ज करवाया है।
कल एक छात्र कोचिंग से निकलकर सीधे राज्य साइबर सेल इंदौर पहुंचा और यहां पर एसआई इतेंद्रसिंह से मिला। उसने एसआई को बताया कि उसकी एक दोस्त, जो इंदौर की रहने वाली है और भोपाल में किसी परीक्षा की तैयारी कर रही है, का उसे फोन आया था कि अर्जेंट पैसे चाहिए। वह रो भी रही थी। उसने उसे कहा कि मैं थोड़ी देर में पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर करता हूं। उसे शंका हुई और वह सीधे राज्य साइबर सेल पहुंच गया। इस पर एसआई ने तुरंत छात्रा से संपर्क किया और उसको बताया कि इस तरह साइबर ठग लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर ठगी करते हैं। इस पर छात्रा ने कहा कि वह एक लाख रुपए दे चुकी है। उसे उसके कागजात का मनी लॉन्ड्रिंग में उपयोग होने की धमकी देकर केस में फंसने की बात कहकर डराया गया है। इस पर उन्होंने भोपाल साइबर सेल से बात कर छात्रा को केस दर्ज करवाने को कहा। इस पर छात्रा साइबर सेल पहुंची और भोपाल में केस दर्ज करवाया। इसके चलते वह और पैसे डालने से बच गई। दोस्त की सूझबूझ के चलते वह लाखों रुपए की ठगी से बच गई। कल ही राज्य साइबर सेल ने कल्याण संपत हिल्स में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला को भी डिजिटल अरेस्ट होने से बचाया था। वह एक दिन से डिजिटल अरेस्ट थी। ठगों के कहने पर वह कैनरा बैंक आरटीजीएस करने भी पहुंच गई थी, लेकिन मैनेजर को शंका हुई और उसने उसके पुत्र से बात की। इसके बाद पुत्र घर पहुंचा और फिर राज्य साइबर सेल पहुंचा, जिसके चलते वह डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने से बच गई। दो दिन में राज्य साइबर सेल ने दो लोगों को डिजिटल अरेस्ट का शिकार होने से बचाया। पुलिस ने पिछले साल प्रदेश स्तर पर डिजिटल अरेस्ट को लेकर जो अभियान चलाया था, उसका ही असर है कि अब कई लोग डिजिटल अरेस्ट होने से बच रहे हैं।