नई दिल्ली।बॉलीवुड फिल्म (Bollywood film)दृश्यम (Drishyam)में इंस्पेक्टर गायतोंडे (Inspector Gaitonde)का किरदार निभाकर दर्शकों के बीच खास पहचान बनाने वाले अभिनेता कमलेश सावंत (Actor Kamlesh Sawant)ने अपने करियर से जुड़ा एक दिलचस्प और हैरान करने वाला किस्सा साझा किया है। फिल्म में उनके सख्त पुलिस अधिकारी के किरदार को दर्शकों ने इतनी गंभीरता से लिया कि कुछ लोग उनसे वास्तविक जिंदगी में भी नाराज हो गए थे। एक महिला ने तो उनसे यहां तक कह दिया था कि वह चप्पल से उनका मुंह तोड़ना चाहती है। इस प्रतिक्रिया से कमलेश सावंत घबरा गए थे और वहां से निकलने की कोशिश करने लगे। हालांकि उनकी पत्नी ने उन्हें समझाया कि लोगों की नाराजगी असल में कमलेश से नहीं बल्कि फिल्म में निभाए गए गायतोंडे के किरदार से है।
अमर उजाला से बातचीत में कमलेश सावंत ने बताया कि दृश्यम में इंस्पेक्टर गायतोंडे की भूमिका मिलना उनके लिए किसी बड़े अवसर से कम नहीं था। वह इससे पहले निर्देशक निशिकांत कामत के साथ कई प्रोजेक्ट में काम कर चुके थे। फिल्म के लिए उन्हें लुक टेस्ट देने के लिए बुलाया गया था। उन्होंने पहले अपने निर्माता से बात करने के लिए दो दिन का समय मांगा और फिर ऑडिशन दिया। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी उनका चयन हो जाएगा। लुक टेस्ट के करीब 12 दिन बाद फोन आया कि उन्हें गायतोंडे के किरदार के लिए चुन लिया गया है। यह खबर उनके लिए बेहद खास थी।
अभिनेता ने बताया कि शूटिंग से कुछ समय पहले उन्हें करीब 290 पन्नों की स्क्रिप्ट मिली थी। अगले दिन शूटिंग होनी थी इसलिए पूरी स्क्रिप्ट पढ़ना आसान नहीं था। ऐसे में उन्होंने अपने किरदार से जुड़े हिस्से अलग किए और करीब 90 पन्ने पढ़े। थिएटर में अपने गुरु विजय लक्ष्मण खानोलकर के साथ काम करने का अनुभव उनके लिए काफी मददगार साबित हुआ। थिएटर के दौरान उन्होंने अभिनय के साथ निर्देशन और दूसरे तकनीकी पहलुओं को भी समझा था। इससे उन्हें दृश्यों की जरूरत और दूसरे कलाकारों के संवादों को समझने में आसानी हुई।
दृश्यम रिलीज होने के बाद गायतोंडे के किरदार को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। फिल्म में बच्चों के साथ सख्ती दिखाने वाले इस पुलिस अधिकारी से कुछ दर्शक इतनी नाराज हो गईं कि उन्होंने अभिनेता को ही उस किरदार से जोड़ लिया। कमलेश सावंत ने बताया कि जब एक महिला ने चप्पल से उनका मुंह तोड़ने की बात कही तो वह डर गए। उन्हें लगा कि कहीं कोई उनके साथ बदसलूकी न कर दे। उन्होंने अपने ड्राइवर से वहां से निकलने को कहा। इसी दौरान उनकी पत्नी ने उन्हें समझाया कि दर्शक कमलेश सावंत को नहीं बल्कि गायतोंडे को गालियां दे रहे हैं। पत्नी की बात से उन्हें एहसास हुआ कि दर्शकों की नाराजगी दरअसल उनके अभिनय की प्रभावशीलता का संकेत भी हो सकती है।
कमलेश ने एक और भावुक किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म में बच्चों के साथ सख्त व्यवहार वाले दृश्यों को देखकर करीब दो साल की एक बच्ची ने अपने पिता के फोन से उन्हें मैसेज किया था। बच्ची को विश्वास था कि स्वरा के पापा असल जिंदगी में बच्चों को नहीं मार सकते और फिल्म में उन्हें गलत दिखाया गया है। यह संदेश पढ़कर अभिनेता भावुक हो गए। उन्हें लगा कि छोटी उम्र के दर्शक भी पर्दे पर दिखने वाले किरदार और असल इंसान के बीच अंतर समझने की कोशिश करते हैं।
फिल्म में अनु सालगांवकर का किरदार निभाने वाली बाल कलाकार मृणाल जाधव के साथ सख्त दृश्य करना भी उनके लिए आसान नहीं था। कमलेश के मुताबिक एक सीन में बच्ची को बार बार गिरना पड़ा था। वह ऐसे दृश्यों के बाद बच्चों से माफी भी मांगते थे ताकि उन्हें यह समझ आए कि यह सब अभिनय का हिस्सा है। असल जिंदगी में उन्हें बच्चों के साथ समय बिताना और उनके साथ खेलना पसंद है।
कमलेश सावंत का मानना है कि दृश्यम ने उनके करियर को नई पहचान दी। वह पहले भी लगातार काम कर रहे थे लेकिन इस फिल्म के बाद दर्शक उन्हें गायतोंडे के नाम से पहचानने लगे। उनके मुताबिक फिल्म की सफलता से इंडस्ट्री में उनकी पहचान और काम के लिए मिलने वाले मेहनताने पर बातचीत करने की स्थिति बेहतर हुई। उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यही है कि दर्शक आज भी उनके किरदार को याद रखते हैं और उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं।