
तिरुवनंतपुरम। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने देश में गहराते ऊर्जा संकट के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है। विजयन ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों ने अमेरिकी प्रभाव में आकर ऐसे फैसले लिए, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा आज अधर में लटक गई है।
सीएम विजयन ने कहा कि वर्ष 2006 में भारत ने प्रस्तावित भारत-ईरान गैस पाइपलाइन परियोजना से अपने हाथ खींच लिए थे। यह एक ऐतिहासिक गलती थी। उन्होंने सीधा-सीधा आरोप लगाया कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने अमेरिका के दबाव में आकर यह कदम उठाया था। अगर यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता, तो आज देश की ऊर्जा जरूरतें सस्ती और सुलभ होतीं।
विजयन ने तत्कालीन केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर को हटाए जाने के मामले को भी दोबारा हवा दी। उन्होंने दावा किया कि अय्यर को सिर्फ इसलिए हटाया गया क्योंकि वे पाइपलाइन परियोजना के प्रबल समर्थक थे। उनकी जगह मुरली देवड़ा को लाया जाना इस बात का संकेत था कि सरकार की प्राथमिकताएं ‘देश हित’ से हटकर ‘कॉर्पोरेट हितों’ की ओर झुक गई थीं।
मुख्यमंत्री ने वर्तमान मोदी सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि आज भी नीतियां कुछ खास निजी ऊर्जा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं। रूस से कच्चे तेल की खरीद के मामले में भी उन्होंने केंद्र के रुख को ढुलमुल बताया। उन्होंने कहा कि भारत बाहरी दबावों के आगे घुटने टेक रहा है।
विजयन के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार पर अत्यधिक निर्भरता के कारण आज देश का आम आदमी और उद्योग जगत बर्बादी की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए न तो पर्याप्त ‘स्ट्रेटेजिक रिजर्व’ बनाए और न ही घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर कोई गंभीर काम किया। अब सरकार को सतर्क होने की जरूरत है।
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