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BCCI ने बदला DRS का ये नियम, अब IPL में नहीं चलेगी टीमों की चालाकी

March 30, 2026

नई दिल्ली: आईपीएल (IPL 2026) के नए सीजन में अभी सिर्फ 2 मैच हुए हैं और ऐसे में कई नए नियमों को लेकर अभी भी धीरे-धीरे स्थिति साफ हो रही है. आईपीएल 2026 में कुछ नए नियम लागू किए गए हैं तो कुछ पुराने नियमों में बदलाव किया गया है. ऐसा ही एक बड़ा फैसला डिसीजन रिव्यू सिस्टम यानि DRS को लेकर किया गया है, जिससे टीमों की चालाकी पर रोक लग जाएगी. BCCI ने ये बड़ा बदलाव किया है DRS के इस्तेमाल को लेकर, जिसमें थर्ड अंपायर सिर्फ उस फैसले की जांच करेगा, जिसके लिए अपील की गई है. यानि एक DRS पर अब से सिर्फ एक ही चेक होगा.

क्रिकबज की रिपोर्ट में बताया गया है कि नया सीजन शुरू होने से पहले सभी 10 कप्तानों की मीटिंग में इस बदलाव की जानकारी दी गई. इसको लेकर BCCI में मैच रेफरी के हेड जवागल श्रीनाथ और अंपायर हेड नितन मेनन ने टीमों को इसके बारे में विस्तार से समझाया और बताया कि इनका कैसे इस्तेमाल किया जाना है. अब सवाल ये है कि बदलाव असल में है क्या और ये कैसे लागू होगा.


  • अब क्या होगा DRS में?
    असल में पिछले सीजन तक DRS रेफरल के मामले में जिस फैसले के खिलाफ अपील होती थी, उसके साथ ही अंपायर अन्य जांच भी करता था. मसलन कैच की अपील खारिज होने पर जब फील्डिंग टीम DRS लेती थी, तो उसके साथ वाइड बॉल की जांच भी होती थी. मगर अब ऐसा नहीं होगा. अब अगर फील्डिंग टीम ने कैच के लिए अपील की है तो टीवी अंपायर सिर्फ इस पर ही अपना फैसला सुनाएगा.

    अगर बल्लेबाज को ये लगता है कि उसका बैट गेंद पर नहीं लगा था और इसे वाइड दिया जाना चाहिए था, तो उसे खुद भी DRS रेफरल की अपील करनी होगी. मगर इसमें एक अहम पहलू ये है कि बल्लेबाज को भी ये अपील शुरुआत में मिले 15 सेकेंड के अंदर करनी होगी. टीवी अंपायर का फैसला आने के बाद दोबारा अपील के लिए अलग से 15 सेकेंड नहीं मिलेंगे.

    कनकशन के नियम में भी हुआ बदलाव
    इसके अलावा भी कुछ अन्य नियमों में छोटे लेकिन अहम बदलाव हुए हैं. एक बड़ा फैसला कनकशन सब्स्टीट्यूट को लेकर भी किया गया है. किसी खिलाड़ी को कनकशन के कारण अगर बदलाव की नौबत आती है तो उसकी जगह वैसा ही खिलाड़ी टीम में आएगा लेकिन उसका सेलेक्शन भी उन्हीं 5 में से किया जाएगा, जिनको शुरुआत में इम्पैक्ट सब्स्टीट्यूट के लिए चुना जाएगा. अगर विकेटकीपर को बदलने की नौबत आती है तो इन्हीं मैच के लिए चुने गए स्क्वॉड में से ही किसी को ये जिम्मेदारी दी जाएगी. अगर कोई विदेशी खिलाड़ी कनकशन से जूझता है तो उसके बदले विदेशी खिलाड़ी तभी आ पाएगा अगर प्लेइंग-11 में सिर्फ 3 विदेशी थे, नहीं तो भारतीय खिलाड़ी ही उसे रिप्लेस करेगा.

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